राष्ट्रीय जनता दल को बड़ा झटका लगने की तारीख तय हो चुकी है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की पूर्व प्रदेश प्रवक्ता और महिला विंग की कमान संभाल चुकीं रीतु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामने जा रही हैं। इसको लेकर 26 मई की तारीख तय कर दी गई है।
खुद फेसबुक पोस्ट के जरिए दी जानकारी
रितु जायसवाल ने खुद अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट के जरिए भाजपा में शामिल होने की खबर की पुष्टि कर दी है। उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों को भावुक संदेश लिखते हुए सूचित किया कि वे 26 मई 2026 को बीजेपी कार्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगी। रितु ने अपने पोस्ट में लिखा कि देश की वर्तमान परिस्थितियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा एवं ईंधन की बचत पर दिए जा रहे विशेष बल को देखते हुए वे अनावश्यक भीड़, लंबे काफिले और दिखावे के सख्त खिलाफ हैं।
समर्थकों से रितु जायसवाल की खास अपील
रितु ने कहा कि उनके लिए राजनीति केवल सेवा, जिम्मेदारी और विचार का माध्यम है, न कि किसी प्रदर्शन का और वे सादगी व जनहित के भाव के साथ राष्ट्र सेवा करना चाहती हैं। रितु जायसवाल ने अपने समर्थकों से विनम्र आग्रह किया कि जो जहां है वहीं से अपना आशीर्वाद प्रदान करे और यदि कोई कार्यक्रम में आना ही चाहता है तो अनावश्यक ईंधन की बर्बादी को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन या शेयरिंग वाहनों का उपयोग कर एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दे।
रितु जायसवाल का आरजेडी छोड़ना पहले ही हो गया था तय
बता दें कि मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित रितु जायसवाल का आरजेडी से नाता टूटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान ही तय हो गया था। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काटकर रामचंद्र पूर्वे की बहू को उम्मीदवार बना दिया था। इस फैसले से नाराज होकर रितु ने बगावती तेवर अपनाए और परिहार सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गईं। निर्दलीय लड़ने के बावजूद उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 60 हजार से अधिक वोट हासिल किए और आरजेडी उम्मीदवार को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था। इस बगावत के बाद आरजेडी ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
कभी ठुकराया था बीजेपी का टिकट
जब रितु जायसवाल आरजेडी में थीं, तो उस समय उनका एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने बीजेपी से टिकट मिलने का दावा किया था। वायरल वीडियो में रितु जायसवाल ने बताया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें बीजेपी की तरफ से परिहार सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर मिला था। लेकिन उन्होंने बीजेपी का टिकट सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि वे अल्पसंख्यकों और मुसलमानों की विरोधी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं। उन्होंने कहा था कि वो मुस्लिमों के भरोसे को तोड़कर भाजपा के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ सकतीं।
जेडीयू से शुरू हुआ सफर
हाजीपुर की रहने वाली और एक पूर्व आईएएस अधिकारी की पत्नी रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से की थी। लेकिन वहां अपनी बड़ी पहचान न बनते देख वे आरजेडी में शामिल हो गईं। अपनी आक्रामक और तार्किक शैली के कारण वे जल्द ही तेजस्वी यादव की सबसे भरोसेमंद महिला सिपहसालार बन गईं। पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता और महिला प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारियां दीं।
टिकट नहीं मिलने पर रितु ने दिखाए बगावती तेवर
आरजेडी ने रितु की लोकप्रियता को देखते हुए 2020 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट दिया था, जहां वे बेहद मामूली अंतर (1,549 वोट) से बीजेपी की गायत्री देवी से हार गईं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने उन पर बड़ा दांव खेलते हुए शिवहर सीट से उतारा, लेकिन वहां भी उन्हें आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद के हाथों हार का सामना करना पड़ा। लावली आनंद ने रितु जायसवाल को 29,143 वोटों से हराया था। लगातार दो हार के बाद जब नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने उन्हें परिहार से टिकट देने से इनकार कर दिया, तो रितु ने बगावत का बिगुल फूंक दिया।

