क्या ममता के हाथ से छिनेगी टीएमसी और पार्टी सिंबल? बंगाल में बने महाराष्ट्र की शिवसेना जैसे हालात

Neelam
By Neelam
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) टूट के कगार पर खड़ी दिख रही है। सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। महाराष्ट्र की शिवसेना जैसी राजनीतिक स्थिति बनती दिख रही है। माना जा रहा है कि बागी गुट पार्टी का नाम और सिंबल पर अपना दावा ठोक सकता है।

बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसे हालात!

पार्टी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को हवा दे दी है कि कहीं बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक घटनाक्रम तो नहीं दोहराया जाने वाला है। टीएमसी के 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की।

निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं की सिक्रेट बैठक

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन चर्चाओं ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है।

80 में से 60 एमएलए ममता बनर्जी की बैठक से गायब

वहीं, रविवार को यह मतभेद तब साफ हो गया जब टीएमसी के 80 में से 60 एमएलए ममता बनर्जी के घर पर बुलाई गई मीटिंग में शामिल नहीं हुए। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं। कुछ लोग, जैसे फिल्म निर्माता और पूर्व विधायक राज चक्रवर्ती, चुनाव में हार के बाद पूरी तरह से राजनीति छोड़ चुके हैं।

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विरोध के सुर

पहले से ही, ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुलकर बगावत हो रही है। TMC के कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर उन्हें ही दोषी ठहरा रहे हैं। वे उन पर भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, सीनियर नेताओं को किनारे करने और I-PAC के प्रोफेशनल्स के ज़रिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगा रहे हैं।

ममता बनर्जी ने खुद माना खतरा

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी इस खतरे को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। उन्होंने हाल ही में सार्वजनिक तौर पर कहा कि पार्टी को कमजोर करने और तोड़ने की एक ‘संगठित कोशिश’ चल रही है। ममता ने कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं, न कि कुछ नेता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पार्टी ऐसे लोगों के बिना भी आगे बढ़ सकती है।

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