बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस चंद्रशेखर को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जज नियुक्त किया गया है। जस्टिस एस चंद्रशेखर मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चैनपुर गांव के रहने वाले हैं। मंगलवार को उन्होंने शीर्ष अदालत के जज के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस ऐतिहासिक खबर के आम होते ही उनके पैतृक गांव मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड स्थित चैनपुर में खुशी की लहर दौड़ गई।
जस्टिस चंद्रशेखर के गांव में दौड़ी खुशी की लहर
जस्टिस चंद्रशेखर का पूरा परिवार अभी गांव से बाहर रहता है, लेकिन जैसे ही ग्रामीणों को उनके सुप्रीम कोर्ट में जज बनने की सूचना मिली, गांव के शुभचिंतक, मित्र और रिश्तेदार मंगलवार को एक जगह एकत्रित हुए। सबने एक-दूसरे को बधाई दी।
पूजन-हवन के बाद बांटी गई मिठाई
जस्टिस चंद्रशेखर के पैतृक घर के ठीक सामने स्थित मंदिर में एक भव्य और विधिवत पूजन-हवन का आयोजन किया गया। गांव के पुरोहितों और बुजुर्गों ने बैठकर मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी और जस्टिस चंद्रशेखर के उज्ज्वल भविष्य तथा दीर्घायु होने की कामना की। पूजा संपन्न होने के बाद पूरे गांव में बड़े पैमाने पर मिठाइयां बांटी गईं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च न्यायालय तक का सफर
25 मई 1965 को जन्मे जस्टिस एस चंद्रशेखर ने अपनी कानून की शिक्षा 1993 में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित ‘कैंपस लॉ सेंटर’ से पूरी की। अपने कानूनी करियर की शुरुआत किसी बड़े कॉर्पोरेट घराने के साथ या सीधे हाईकोर्ट में नहीं की। बल्कि, उन्होंने दिल्ली की निचली अदालतों में काम करके अनुभव प्राप्त किया।9 नवंबर 1993 को दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होने के बाद उन्होंने दिल्ली में आपराधिक और दीवानी मामलों में वकालत शुरू की।
19 वर्षों के कार्यकाल में 3500 मामलों में पैरवी की
कड़ी मेहनत के दम पर महज तीन साल के भीतर ही श्री चंद्रशेखर सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने पहुंच गए। उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत में लगभग 19 वर्षों तक सक्रिय रूप से वकालत की। इस दौरान, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 3,500 से ज्यादा मामलों में अलग-अलग पक्षों की पैरवी की, जिसमें 140 से ज्यादा रिपोर्टेड जजमेंट्स शामिल हैं जो आज भी कानून की किताबों में मिसाल के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं।वे सुप्रीम कोर्ट में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और झारखंड सरकार के स्थायी अधिवक्ता भी रहे। इसके अलावा उन्होंने बिहार राज्य आवास बोर्ड, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जैसी शीर्ष संस्थाओं का प्रतिनिधित्व किया।

