फिर डराने लगा चांडिल डैम का पानी: 7 रेडियल गेट खुले, हर मानसून के साथ गहराती है विस्थापितों की टीस

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही चांडिल डैम के डूब क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की रात की नींद और दिन का चैन उड़ गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से डैम का जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़कर 179.75 मीटर तक पहुंच गया। स्थिति बेकाबू न हो, इसे देखते हुए परियोजना प्रशासन ने एहतियातन डैम के सात रेडियल गेट को आधा-आधा मीटर और 152 मीटर अंडर स्यूलिस गेट को एक मीटर तक खोल दिया। गेट खुलते ही भारी मात्रा में पानी की निकासी शुरू हुई, जिससे शाम तक जलस्तर थोड़ा घटकर 179.60 मीटर पर आया। पानी का स्तर थोड़ा नीचे गिरते ही विस्थापित परिवारों ने अस्थाई रूप से राहत की सांस तो ली, लेकिन उनके सिर पर मंडरा रहा बेघर होने का खतरा अभी टला नहीं है।

जलस्तर बढ़ा नहीं कि धड़कनें तेज…
​चांडिल डैम का यह नजारा कोई नया नहीं है, बल्कि हर साल मानसून में दोहराई जाने वाली एक दर्दनाक दास्तान बन चुका है। जैसे ही बांध में पानी भरता है, किनारे बसे दर्जनों विस्थापित गांवों में खौफ की लहर दौड़ जाती है।

विस्थापितों का छलका दर्द
हर साल बारिश आते ही हमारी धड़कनें तेज हो जाती हैं। पानी बढ़ते ही हमारे घरों में जलजमाव शुरू हो जाता है। मकान ढहते हैं, सामान बह जाता है और मवेशियों को बचाने की जद्दोजहद शुरू हो जाती है। हर बार हमें अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ती है, लेकिन इस स्थाई मुसीबत का कोई पक्का समाधान आज तक नहीं निकला।

मानसून आते ही बेबसी का मंजर
​डैम में अतिरिक्त पानी की आवक जारी रहने पर अगर जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी होती है, तो निचले इलाकों और डूब क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का सीधा खतरा बन जाएगा। विस्थापन का दंश झेल रहे इन परिवारों के लिए मानसून राहत नहीं, बल्कि हर साल आने वाली एक आफत बनकर रह गया है, जहां उनकी संपत्ति, पशुधन और सिर छुपाने की छत हमेशा दांव पर लगी रहती है।

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