डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : एक मां जब जिद पर अड़ जाए, तो क्या कोई कानूनी दांव-पेच काम आता है? सरायकेला-खरसावां के आदित्यपुर इलाके में एक ऐसा ही वाकया सामने आया, जहां पति-पत्नी के आपसी झगड़े ने पूरी पुलिस व्यवस्था की नाक में दम कर दिया। अपने मासूम को पति से वापस छीनने की होड़ में एक महिला ने अपहरण का ऐसा काल्पनिक जाल बुना कि खाकी भी 48 घंटों तक सड़कों की धूल फांकती रही।
नीली स्कूटी, अंजान शख्स और ‘मिसिंग’ का खौफ
मामले की शुरुआत 24 जुलाई से हुई, जब विद्युत नगर की रहने वाली सानुका महतो आदित्यपुर थाने पहुंची। चेहरे पर घबराहट और आंखों में डर दिखाते हुए महिला ने दावा किया कि कोई अज्ञात शख्स मेरे 5 साल के मासूम को नीली रंग की स्कूटी पर बिठाकर रफूचक्कर हो गया है। अपहरण की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तुरंत विशेष जांच टीम का गठन किया गया। शहर के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से लेकर चप्पे-चप्पे के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाने लगे। पुलिस किसी बड़े किडनैपिंग रैकेट के खतरे को देखते हुए दिन-रात एक कर रही थी।
गोलपहाड़ी सब्जी मंडी में मिला गुमशुदा
मामले में मोड़ तब आया जब पुलिस की तफ्तीश का दायरा महिला के अलग रह रहे पति नीलू महतो तक पहुंचा। पुलिस टीम ने जब जमशेदपुर के परसुडीह (गोलपहाड़ी सब्जी मंडी) स्थित नीलू के ठिकाने पर दबिश दी, तो नजारा कुछ और ही था। मासूम अपने पिता के साथ हंसता-खेलता हुआ मिला। जब पुलिस ने नीलू से सख्ती से पूछताछ की, तो सारा ड्रामा बेनकाब हो गया। नीलू ने साफ किया कि वह अपनी पत्नी और सास को बताकर ही अपने बेटे को अपने साथ लाया था, कोई जबरदस्ती या किडनैपिंग नहीं हुई थी।
सच आया सामने: बेटे को पाने के लिए रची कहानी
पति के बयान के बाद जब सानुका से सवाल-जवाब किए गए, तो वह टूट गई। उसने कबूल किया कि पति से चल रहे विवाद के बीच वह बच्चे को जल्द से जल्द अपने पास वापस बुलाना चाहती थी। इसी हड़बड़ी और गुस्से में उसने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ डाली।
कानूनी कार्रवाई नहीं, मिली कड़ी हिदायत
आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी सिंह ने बताया कि पुलिस के 48 घंटे भले ही इस झूठी सूचना के कारण बर्बाद हुए, लेकिन बच्चे के भविष्य और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। बच्चा सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया गया है।

