जेल से रिहाई के बाद छोटे भाई तेजस्वी से मिले तेज प्रताप, क्या भरने लगी है दोनों भाइयों के बीच की दरार?

Neelam
By Neelam
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NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुआ। इस विरोध का सबसे ज्यादा असर बिहार में दिखा। राजधानी पटना से लेकर सीवान, छपरा, बेगूसराय से लेकर लगभग हर जिले में दिखा। हजारों छात्र सड़कों पर उतरे और कई छात्रों और नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया। गिरफ्तार होने वालों में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप भी थे। अब उनकी रिहाई हो चुकी है। इस रिहाई ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल पैदा कर दी है।

महीनों बाद दोनों भाइयों की आमने-सामने की मुलाकात

जनशक्ति जनता दल के मुखिया और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को 25 जुलाई को हुए बिहार बंद के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तेज प्रताप मंगलवार शाम को जेल से बाहर निकल गए। उसके बाद वो सीधे अपनी माता राबड़ी देवी और छोटे भाई तेजस्वी यादव से कौटिल्य नगर वाले लालू परिवार के आवास पर मिले। दोनों भाई इस बार आमने-सामने होकर मिले। 

जेल से सीधे परिवार के बीच पहुंचे तेज प्रताप

पिछले कुछ महीनों से परिवार और राजनीति, दोनों मोर्चों पर अलग-थलग दिख रहे तेज प्रताप जैसे ही बेउर जेल से बाहर आए, उनकी पहली मंजिल कोई राजनीतिक मंच नहीं घर बना। करीब दो महीने के लंबे गैप के बाद ये पहली फेस-टू-फेस मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों भाई 27 मई को गाजियाबाद में तेजस्वी के बेटे इराज यादव के पहले जन्मदिन समारोह में एक साथ देखे गए थे।

तेज प्रताप की गिरफ्तारी पर तेजस्वी ने दी थी आंदोलन की चेतावनी

बता दें कि जब तेज प्रताप को गिरफ्तार किया था, जिसके विरोध में तेजस्वी ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया था। तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा था। साथ ही उग्र आंदोलन की चेतावनी दी थी। तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी की बात सुनकर जिस प्रकार तेजस्वी यादव ने रियेक्ट किया था। सियासी जानकारों का मानना है कि इससे दोनों भाइयों के बीच की दूरियां कम हुईं हैं।

दोनों भाइयों के बीच की दूरियां कम हुईं?

अनुष्का यादव प्रकरण को लेकर तेज प्रताप यादव को पहले राष्ट्रीय जनता दल उसके बाद घर से से निष्कासित कर दिया गया था। परिवार और पार्टी से अलग होने के बाद तेज प्रताप ने बिहार विधानसभा चुनावों में राजद के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे थे, हालांकि जेजेडी को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी। उस दौर में तेज प्रताप तेजस्वी के सलाहकारों को ‘जयचंद’ तक कहकर संबोधित करते थे। हालांकि, मुसीबत के वक्त तेजस्वी के कड़े रुख और जेल से निकलते ही तेज प्रताप की इस मुलाकात से दूरियां घटने के कयास लगाए जा रहे हैं।

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