किस विशिष्ता के आधार पर हुआ दीपक प्रकाश का मनोनयन, क्या बिहार सरकार का ये फैसला संवैधानिक है?

Neelam
By Neelam
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बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद में मनोनीत कर दिए गए हैं। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। सर्वोच्च अदालत में अगली सुनवाई होती, उससे पहले दीपक प्रकाश को विधान परिषद में मनोनीत किया गया। उनके मनोनयन के साथ ही मंत्री पद पर लटक रही तलवार हट गई।

दीपक प्रकाश के मनोनयन पर सवाल

दीपक प्रकाश को उस सीट पर मनोनीत किया गया है, जो बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। सरकार ने इस रिक्त सीट के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया था, जिस पर राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद मनोनयन की प्रक्रिया पूरी हुई। हालांकि, बड़ा सवाल ये है कि किस विशिष्ता के आधार पर दीपक प्रकाश का हुआ मनोनयन?

क्या संवैधानिक है ये मनोनयन?

संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार राज्यपाल, विधान परिषद में कुल सदस्य संख्या का 1/6 हिस्सा मनोनीत कर सकते हैं। बिहार में राज्यपाल अधिकतम 12 सदस्यों को विधान परिषद में मनोनीत कर सकते हैं। लेकिन इसमें भी शर्त है। जिन व्यक्तियों ने साहित्य एवं पत्रकारिता, कला, विज्ञान, सहकारिता आंदोलन, और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है, उनके नाम ही इस कोटि के लिए प्रस्तावित किये जा सकते हैं।

बिना किसी सदन के सदस्यता के मंत्री बनने पर भी सवाल

देवेश कुमार को 2021 में पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए विधान परिषद में मनोनीत किया गया था। इस आधार पर इस खाली जगह पर किसी सम्मानित पत्रकार को ही मौका मिलना चाहिए था। इससे पहले भी दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने को लेकर संवैधानिक प्रश्न खड़े हो रहे थे। जिसपर उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि किसी सदन का सदस्य नहीं होने के बावजूद वह मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं।

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