राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने शुक्रवार को बिहार में पार्टी के सभी प्रकोष्ठों -इकाईयों को भंग कर दिया है। इस फैसले को पार्टी के भीतर एक बड़े और आवश्यक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस निर्णय का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने ये कहा कि यह कदम बहुत पहले ही उठाया जाना चाहिए था। साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव को अनुभवी और संघर्षशील नेताओं को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
लालूवादियों को प्राथमिकता देने की जताई उम्मीद
रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पार्टी की जिन इकाईयों- प्रकोष्ठों को भंग करने का जो निर्णय कल लिया गया, ये निर्णय काफी पहले लिया जाना चाहिए था। उम्मीद है कि नयी इकाईयों के पुनर्गठन में कट्टर लालूवादियों, सालों से पार्टी के साथ पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ खड़े कार्यकर्ताओं-संगठन की समझ रखने वालों और जमीन से जुड़े जुझारू लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
लालू जी के सिद्धांतों से ही पार्टी की बेहतरी-रोहिणी
रोहिणी ने आगे लिखा कि जमीन से जुड़े लोगों, सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक तौर पर हाशिए पर खड़े लोगों को आगे लाना, कार्यकर्ताओं को उचित अवसर और अहोदा देना ही सदैव लालू जी की प्राथमिकता रही है और सिर्फ लालू जी के सिद्धांतों, उनके दिखाए गए रास्ते पर चल कर ही पार्टी की बेहतरी संभव है।
सभी संगठनात्मक इकाइयों भंग
इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राजद बिहार की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया था। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की हस्ताक्षर से एक लेटर भी जारी कर दिया गया। इसमें कहा गया कि राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए प्रदेश की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इसके साथ ही जिला, प्रखंड, पंचायत तथा विभिन्न प्रकोष्ठों समेत सभी स्तरों की संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का निर्णय लिया गया है।
बांकीपुर उपचुनाव मे हार के बाद बड़ा फैसला
बता दें कि राजद में संगठनात्मक फेरबदल हाल ही में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजद की हार के बाद हुआ है। बांकीपुर में पार्टी प्रत्याशी की जमानत जब्त होने के बाद बाद पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों खुलकर सामने आ गए थे। राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच सार्वजनिक तौर पर हुई बहस ने आंतरिक कलह की अटकलों को और हवा दी थी। बढ़ते राजनीतिक नुकसान और अंदरूनी कलह को देखते हुए तेजस्वी यादव ने कड़े फैसले लेते हुए संगठन में अनुशासन तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

