बिहार में शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में सम्राट सरकार की ओर से चार बड़े ऐलान किए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर इन चार घोषणाओं का जिक्र किया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगी विशेष समिति
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन फैसलों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक विद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाना और छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष राज्यस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने और छात्रों के सीखने की क्षमता में लगातार सुधार के लिए जरूरी सुझाव देगी। सरकार का प्रयास है कि राज्य के प्रत्येक विद्यालय को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाओं से जोड़ा जा सके।
परीक्षा प्रणाली में तकनीक और AI का होगा इस्तेमाल
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए भी राज्यस्तरीय परीक्षा सुधार समिति बनाई जाएगी। यह समिति बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और कक्षा स्तर पर होने वाले मूल्यांकन को अधिक सुचारु, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के उपाय सुझाएगी। छात्रों के ज्ञान, समझ और विश्लेषण क्षमता के आकलन को बेहतर बनाने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
छात्रों से सीधे संवाद करेंगे मुख्यमंत्री और मंत्री
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े छात्रों के सुझाव और समस्याएं जानने के लिए विशेष सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक छात्रों के साथ सीधे संवाद करेंगे। सरकार का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए छात्रों की समस्याओं को समझने और उनके सुझावों के आधार पर शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलेगी।
छात्र कल्याण के लिए अलग निदेशालय का गठन
मुख्यमंत्री ने छात्र कल्याण से जुड़ा एक और बड़ा फैसला बताया। छात्रों के हित में चलने वाली योजनाओं और कार्यों के बेहतर समन्वय तथा प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों में निदेशालय का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्र कल्याण से जुड़े कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू करना होगा।

