किसान के बेटे से टाटा संस के चेयरमैन तक का सफर, अब एन. चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का किया ऐलान

Reena Sharma
4 Min Read

तमिलनाडु के एक किसान परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक टाटा समूह की कमान संभालने वाले एन. चंद्रशेखरन का करीब चार दशक लंबा सफर अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को पद से हटने का ऐलान किया है। हालांकि वह तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करते हुए फरवरी 2027 तक चेयरमैन बने रहेंगे। इसके बाद वह दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे।

किसान परिवार से शुरू हुआ सफर

एन. चंद्रशेखरन का जन्म तमिलनाडु के मोहनूर में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पढ़ाई की और रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) की डिग्री हासिल की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1987 में उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से अपने करियर की शुरुआत की। करीब दो दशक से अधिक समय तक TCS में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद वर्ष 2009 में वह कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर बने।

2017 में संभाली टाटा संस की कमान

एन. चंद्रशेखरन के करियर का सबसे बड़ा पड़ाव वर्ष 2017 में आया, जब उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। वह टाटा समूह के पहले गैर-पारसी और पेशेवर कार्यकारी चेयरमैन बने।

उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार सहित कई क्षेत्रों में विस्तार किया। उन्होंने टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

40 साल टाटा समूह में बिताए

अपने पद से हटने के फैसले की जानकारी देते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने टाटा समूह में 40 साल का पेशेवर जीवन पूरा किया है। उन्होंने टाटा संस का नेतृत्व करना अपने लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी बताया।

उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा। इसके बाद वह टाटा संस के चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज थीं।

चेयरमैन पद छोड़ने के पीछे क्या है वजह?

रिपोर्टों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के नेतृत्व से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर पिछले कुछ समय से मतभेद सामने आए थे। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस की संभावित लिस्टिंग, एयर इंडिया से जुड़े मुद्दों और बोर्ड प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को लेकर भी मतभेदों की खबरें सामने आई हैं।

18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक से कुछ दिन पहले चंद्रशेखरन का यह फैसला सामने आया है। उनके फैसले के बाद अब टाटा समूह के अगले चेयरमैन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

करोड़ों रुपये का रहा पारिश्रमिक

चंद्रशेखरन का पारिश्रमिक भी कई बार चर्चा में रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में उन्हें टाटा संस से करीब 158.66 करोड़ रुपये का कुल पारिश्रमिक मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें वेतन, अन्य लाभ और प्रॉफिट-लिंक्ड कमीशन शामिल था।

किसान परिवार से निकलकर TCS के शीर्ष पद और फिर टाटा संस के चेयरमैन तक पहुंचने वाले एन. चंद्रशेखरन की कहानी भारतीय कॉरपोरेट जगत में एक उल्लेखनीय सफर के तौर पर देखी जाती है। अब फरवरी 2027 में उनके कार्यकाल के अंत के साथ टाटा समूह के नेतृत्व में एक नया अध्याय शुरू होगा।

Share This Article