अपराधियों की खैर नहीं! घाघीडीह से चाईबासा तक, कोल्हान की जेलों में मास्टरप्लान तैयार

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर :झारखंड की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने की अब कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। गृह, कारा व आपदा प्रबंधन विभाग ने कोल्हान प्रमंडल समेत राज्य के प्रमुख जिलों की जेलों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए बड़े पैमाने पर हाइटेक ढांचागत बदलाव करने का फैसला किया है। नए मास्टरप्लांस के तहत घाघीडीह (जमशेदपुर), चाईबासा और सरायकेला सहित कई जेलों में नए वॉच टावर, प्रशासनिक भवन और मेन गेट शेड का निर्माण कराया जाएगा, ताकि जेल परिसर और उसकी बाउंड्री पर 360-डिग्री नजर रखी जा सके।

क्या-क्या बदलेगा?

घाघीडीह सेंट्रल जेल (जमशेदपुर): 360 डिग्री नजर रखेंगे 6 नए वॉच टावर
बजट: ₹79.91 लाख, समय सीमा: 4 महीने

प्लान: जेल की चारदीवारी और अति-संवेदनशील बैरकों पर 360 डिग्री से कड़ी निगरानी रखने के लिए 6 नए हाई-टेक वॉच टावर बनाए जाएंगे। इससे दूर से ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि को पकड़ा जा सकेगा।

चाईबासा मंडल कारा (पश्चिम सिंहभूम): 8 नए वॉच टावर से बढ़ेगी पहरेदारी

बजट: ₹99.04 लाख (वॉच टावर) + ₹7.38 लाख (वाटरप्रूफिंग), समय सीमा: वॉच टावर (6 माह), वाटरप्रूफिंग (3 माह)

प्लान: जेल परिसर में 8 नए वॉच टावर बनाए जाएंगे। साथ ही स्टाफ क्वार्टर की छतों के वाटरप्रूफिंग का काम भी तीन महीने के भीतर पूरा होगा।

    सरायकेला मंडल कारा: 50 लाख में बनेगा नया प्रशासनिक भवन
    बजट: ₹50 लाख, समय सीमा: 6 महीने

    प्लान: सरायकेला जेल के बेहतर संचालन और प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाने के लिए एक नया और आधुनिक प्रशासनिक भवन तैयार किया जाएगा।

    सिमडेगा, खूंटी और गुमला जेलों की भी बदलेगी सूरत

    केवल कोल्हान ही नहीं, राज्य के अन्य जिलों की सुरक्षा में भी इजाफा किया जा रहा है।

      सिमडेगा मंडल कारा: 8 वॉच टावर और मेन गेट शेड के निर्माण पर ₹1.37 करोड़ खर्च होंगे।

      खूंटी उपकारा: 3 वॉच टावर, मेन गेट शेड, बैरकों और क्वार्टरों की विशेष मरम्मत के लिए ₹44.02 लाख का बजट पास किया गया है।

      गुमला मंडल कारा: मेन गेट शेड के निर्माण पर ₹9.32 लाख और विशेष मरम्मत कार्यों पर ₹25.86 लाख खर्च किए जाएंगे।

      क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत?
      जेलों में बंद कुख्यात अपराधियों और उग्रवादियों पर चौबीसों घंटे सीधी नजर रखना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। गृह विभाग की इस मंजूरी के बाद जेल प्रहरियों को चहारदीवारी से लेकर संवेदनशील बैरकों तक स्पष्ट और दूर तक देखने में आसानी होगी। काम की समयसीमा तय कर दी गई है और अगले कुछ महीनों में जेल सुरक्षा का नया ढांचा पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

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