8 लाख कर्मचारी आंदोलन से जुड़े, मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल
देवघर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर के बैंक कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। देवघर इकाई के UFBU संयोजक मुन्ना कुमार झा ने बताया कि इस आंदोलन से देशभर के करीब 8 लाख बैंक कर्मचारी जुड़े हैं। बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 5-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) में असमानता दूर करना और वेतन समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान शामिल है।
ढाई वर्षों से लंबित है 5-दिवसीय कार्य सप्ताह का प्रस्ताव
मुन्ना कुमार झा के अनुसार, 5-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने का प्रस्ताव करीब ढाई वर्षों से सरकार के पास लंबित है। इसे बार-बार ‘सक्रिय विचाराधीन’ बताए जाने के बावजूद अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने PLI व्यवस्था में असमानता का आरोप लगाते हुए कहा कि स्केल-3 तक के कर्मचारियों को अधिकतम 15 दिनों के वेतन के बराबर, करीब 25 हजार रुपये तक का लाभ मिलता है, जबकि स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए यह लाभ 365 दिनों तक, करीब 10 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यूनियन का दावा है कि बैंकिंग क्षेत्र के करीब 95 प्रतिशत कर्मचारियों को PLI का वास्तविक लाभ बेहद कम मिलता है।
वेतन समझौते के लंबित मुद्दों पर भी नाराजगी
UFBU नेताओं का कहना है कि पिछले वेतन संशोधन समझौतों के दौरान कई लंबित मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बैंक प्रबंधन और सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। बैंक कर्मचारी नेताओं ने यह भी कहा कि नोटबंदी और जनधन खातों के विस्तार जैसे राष्ट्रीय अभियानों को सफल बनाने में बैंक कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन कर्मचारियों की मांगों और कल्याण से जुड़े कई मुद्दे अब भी लंबित हैं।
तीन चरणों में आंदोलन का रोडमैप
आंदोलन के पहले चरण में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। दूसरे चरण में 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल प्रस्तावित है। तीसरे चरण में मांगें नहीं मानी गईं तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और व्यापक
बैंक यूनियन नेताओं ने सरकार और बैंक प्रबंधन से मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

