डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े होल्डिंग समूह टाटा संस के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीतियों को लेकर एक बेहद अहम घटनाक्रम सामने आया है। गुरुवार को मुंबई में हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों के तहत कंपनी के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले 5 साल यानी साल 2032 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही समूह ने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
कार्यकाल विस्तार और रिटायरमेंट नियमों का अपवाद
एन. चंद्रशेखरन का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने वाला था और वे उस समय 65 वर्ष के हो जाते। टाटा ग्रुप के नियमों के मुताबिक एग्जीक्यूटिव पदों पर काम करने वाले अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र आमतौर पर 65 वर्ष तय है। हालांकि, इस बार टाटा ग्रुप के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी शीर्ष अधिकारी को स्टैंडर्ड रिटायरमेंट उम्र से आगे यानी 70 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहने की अनुमति दी गई है। अब वह 2032 तक इस जिम्मेदारी को संभालेंगे।
बोर्ड बैठक में नोबेल टाटा पड़ गए अल्पमत में
इस पूरे फैसले के पीछे बोर्ड रूम के भीतर चली खींचतान भी अहम रही है। टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस कार्यकाल विस्तार के खिलाफ बताए जा रहे थे, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का पुरजोर समर्थन किया। आखिरकार, गुरुवार को हुई तीन घंटे चली मैराथन बोर्ड मीटिंग में वोटिंग के दौरान नोबेल टाटा अल्पमत में रह गए और अन्य निदेशकों के समर्थन से यह प्रस्ताव पास हो गया।
आरबीआई के नियमों के तहत आईपीओ की तैयारी
टाटा संस को शेयर बाजार में उतारने का यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक के विनियामक ढांचे के दबाव के कारण लिया गया है। सितंबर 2022 में आरबीआई ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में बांटा था, जिसके नियमों के तहत कंपनी के लिए तीन साल के भीतर यानी 2025-2026 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था। हाल ही में आरबीआई द्वारा एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज किए जाने के बाद, अब कंपनी के पास आईपीओ लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी स्थिरता को बनाए रखने के लिए बोर्ड ने यह बड़ा कदम उठाया है।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप की शानदार छलांग
एन. चंद्रशेखरन ने अपने करियर की शुरुआत 1987 में टीसीएस में एक इंटर्न के रूप में की थी। साल 2009 में वे टीसीएस के सीईओ बने और अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए, जिसके बाद जनवरी 2017 में उन्हें समूह की कमान सौंपी गई। उनके नेतृत्व के पिछले 9 वर्षों में टाटा ग्रुप ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।
रेवेन्यू: वित्तीय वर्ष 2020 में जो रेवेन्यू ₹7.89 लाख करोड़ था, वह वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ पर पहुंच गया है।
मुनाफा: इस अवधि में समूह का कुल मुनाफा ₹32,000 करोड़ से छलांग लगाकर ₹1.71 लाख करोड़ हो गया।
मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 2020 के ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में ₹24.39 लाख करोड़ पर पहुंच गया है।
चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप को पारंपरिक व्यवसायों के अलावा एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए और आधुनिक क्षेत्रों में मजबूती से आगे बढ़ाया है।

