रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में SVU का बड़ा एक्शन, IAS समेत 3 अफसर गिरफ्तार

Neelam
By Neelam
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रिशु श्री टेंडर माफिया के साथ बिहार के कई अधिकारी के कनेक्शन ने सामने आए हैं। इस बीच बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई की है। निगरानी टीम ने मामले में नामजद 3 अधिकारियों को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

इन तीन अफसरों पर कसा शिकंजा

एसवीयू ने बुधवार को तीनों अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। एसवीयू की ओर से गिरफ्तार अफसरों में उमेश कुमार सिंह, तारिणी दास और आईएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी सिंह शामिल है। चौधरी अभी वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित है। जबकि तारिणी दास, चीफ इंजीनियर (बर्खास्त हुए और फिर कांट्रैक्ट पर बहाल भी) है। वहीं उमेश कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद कर कार्यरत हैं।

तीनों अधिकारियों के ठिकानों पर पड़ा था ईडी का छापा

बताया जा रहा है कि इन तीनों अधिकारियों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वर्ष 2024 में छापेमारी की थी। उस दौरान 11.50 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद हुई थी। ईडी की कार्रवाई में तारिणी दास के पास से करीब 8.5 करोड़ रुपये, मुमुक्षु चौधरी के घर से 2 करोड़ रुपये और उमेश कुमार सिंह के ठिकाने से करीब 1 करोड़ रुपये बरामद किए गए थे।

तीनों अधिकारियों पर क्या है आरोप

इस छापेमारी के बाद विशेष निगरानी इकाई ने तारिणी प्रसाद, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह के विरुद्ध पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए मुमुक्षु ने रिशुश्री की कंपनियों को रिश्वत के बदले करोड़ रुपये के ठेके आवंटित किए थे। तारिणी दास पर भी पैसे लेकर नकद कमिशन लेने का आरोप लगा जिसके बाद उनकी विस्तारित सेवा भी खत्म कर दी गई। वहीं उमेश कुमार सिंह पर ठेकेदारों और एजेंसियों के साथ मिलकर संगठित भ्रष्टाचार तंत्र खड़ा करने का आरोप लगा। रिशु श्री की कंपनी समेत अन्य एजेंसियों के बिलों के भुगतान में से एक निश्चित हिस्सा उमेश कुमार सिंह तक पहुंचता था।

रिशुश्री टेंडर घोटाले का मुख्य आरोपी

रिशुश्री बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले का मुख्य आरोपी माना जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने और उसके बदले मोटी रकम लेने का नेटवर्क चलाता था। आरोप है कि पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत और अवैध कमाई का खेल चलता था। इसी वजह से उसे इस मामले का “किंगपिन” या मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

कई बार रिशु श्री के ठिकानों पर हो चुकी है छापेमारी

बता दें कि ईडी ने इससे पहले मार्च 2025 में कई ट्रैवल एजेंटों और पटना में कई सरकारी अधिकारियों के आवासीय परिसरों में छापेमारी की थी। उस समय कुल 11.64 करोड़ कैश बरामद किया गया था। अगस्त माह में ठेकेदार रिशु श्री और उसके परिवार के सदस्यों से करीब 68 करोड़ 9 लाख की प्रॉपर्टी जब्त की गई थी। वहीं, 26 नवंबर 2025 को रिशु श्री के 9 ठिकानों पर छापेमारी में 33 लख कैश बरामद किया गया था। फिलहाल जैसे-जैसे जांच एंजेसियां अपनी जांच को आगे बढ़ा रही हैं, वैसे-वैसे रिशु श्री के कारनामे और बड़े-बड़े आईएएस अधिकारियों से उसके सांठ-गांठ के चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

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