अमेरिका-ईरान युद्ध का असर: भारत में महंगाई का विस्फोट! LPG, पेट्रोल-डीजल पर बड़ा झटका तय?
अमेरिका-ईरान युद्ध के दो महीने बाद अब इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल ने महंगाई को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
युद्ध से पहले 70–75 डॉलर प्रति बैरल पर बिकने वाला कच्चा तेल कुछ ही हफ्तों में 125 डॉलर के पार चला गया। हालांकि शनिवार, 2 मई को इसमें हल्की गिरावट के साथ कीमत करीब 108.83 डॉलर पर आ गई, लेकिन राहत अभी भी दूर नजर आ रही है।
इस बढ़ती कीमत का सबसे बड़ा असर एलपीजी पर पड़ा है। फरवरी 2026 के बाद से अब तक चार बार सिलेंडर के दाम बढ़ चुके हैं। 1 मई 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये का भारी इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली में यह सिलेंडर अब 3071.50 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 5 किलो वाला मिनी सिलेंडर भी 261 रुपये महंगा हो गया है।
हालांकि अभी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें 40 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
सबसे बड़ा खतरा अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर मंडरा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले 5-7 दिनों में ईंधन के दाम 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। चार साल से स्थिर खुदरा कीमतों के बावजूद तेल कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं, जिससे अब कीमत बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जो वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ गया है।
सरकार फिलहाल हालात पर नजर बनाए हुए है और कीमतों में बढ़ोतरी के समय और सीमा पर मंथन कर रही है। कोशिश यही है कि तेल कंपनियों के नुकसान को भी कम किया जाए और आम आदमी पर बोझ भी ज्यादा न पड़े।
लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उससे साफ है कि महंगाई का ये तूफान अभी थमने वाला नहीं है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार पहले ही कमर्शियल गैस की मार झेल रहे हैं, और अब आम जनता को भी बड़ा झटका लग सकता है।

