धनबाद। झारखंड के धनबाद निवासी एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त टैक्सोनॉमिस्ट डॉ. तपस चटर्जी ने एक बार फिर विज्ञान जगत में भारत का नाम रोशन किया है। डॉ. चटर्जी और उनकी अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने दुर्लभ Nepenthes stenophylla (पिचर प्लांट) से जुड़े Zwickia घुन (Mite) पर एक एपियोबायोटिक सिलिएट (Epibiotic Ciliate) की खोज की है। यह खोज वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह शोध रूस से प्रकाशित प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Protistology के वॉल्यूम 22 में 19 जून 2026 को प्रकाशित हुआ है। शोध का शीर्षक है – “The first record of the epibiotic ciliate Propyxidium (Ciliophora, Peritrichia) on a Zwickia mite (Acari, Histiostomatidae) from Nepenthes stenophylla, a Bornean pitcher plant”।
शोध के लिए नमूने मलेशिया के सारावाक स्थित पाया मागा (Paya Maga) के 1810 मीटर ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र से एकत्र किए गए थे। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दुनिया का पहला ऐसा रिकॉर्ड है, जिसमें Nepenthes पिचर प्लांट से जुड़े किसी सिलिएट का दस्तावेजीकरण किया गया है। साथ ही किसी Histiostomatid घुन पर सिलिएट की एपियोबायोसिस का भी यह पहला वैज्ञानिक अवलोकन है।
इस अंतरराष्ट्रीय शोध दल में भारत के डॉ. तपस चटर्जी के अलावा रूस के वैज्ञानिक इगोर डोवगल और नेली गवरिलोवा तथा ब्रुनेई के वैज्ञानिक उल्मार ग्राफ और डेविड जे. मार्शल शामिल रहे।
डॉ. तपस चटर्जी धनबाद के हीरापुर क्षेत्र के निवासी हैं और उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से प्राणी विज्ञान में पीएचडी तथा डी.एससी. की उपाधि प्राप्त की है। अब तक वे 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं तथा लगभग 140 नई प्रजातियों और चार नए जेनेरा की खोज कर चुके हैं। उन्होंने दुनिया के 30 से अधिक देशों से जैविक नमूने एकत्र किए हैं और उनकी पहचान एक अग्रणी टैक्सोनॉमिस्ट के रूप में होती है।
डॉ. तपस चटर्जी की यह उपलब्धि न केवल धनबाद बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है। यह खोज सूक्ष्म जीव विज्ञान और जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

