मोतिहारी के शिक्षा विभाग ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली से सभी को चौंका दिया है। इस बार चर्चा का केंद्र बना है एक ऐसा स्पष्टीकरण पत्र, जिसे एक वर्ष पहले दिवंगत हो चुकी शिक्षिका को भेजा गया है।
यूएमएस गोबिंदगंज गर्ल्स स्कूल, अरेराज की शिक्षिका उर्मिला कुमारी, जिनका निधन करीब एक साल पहले हो गया था, उनके नाम पर 3 अप्रैल को शिक्षा विभाग की ओर से अनुपस्थिति और ई-शिक्षा कोष ऐप पर उपस्थिति दर्ज न करने को लेकर 24 घंटे में जवाब तलब किया गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि समय पर स्पष्टीकरण नहीं देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह पत्र डीईओ द्वारा जारी किए गए उन 969 शिक्षकों को भेजा गया है, जो या तो अनुपस्थित पाए गए, या जिनकी उपस्थिति ऐप पर दर्ज नहीं मिली। हैरानी की बात यह है कि इन सभी में एक मृत शिक्षिका का नाम भी शामिल है — सीरियल नंबर 52 पर दर्ज उर्मिला कुमारी।
इस गड़बड़ी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं, “क्या यमलोक से अब स्पष्टीकरण आएगा?”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सिस्टम में अपडेट और मानवीय संवेदनाओं की घोर अनदेखी का प्रतीक है। एक ओर जहां शिक्षा विभाग तकनीकी व्यवस्था को लागू करने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर मृत शिक्षकों की जानकारी तक अपडेट नहीं कर पा रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या विभाग को मृत शिक्षिका की जानकारी नहीं थी, या फिर केवल सूची बनाकर भेज देना ही प्रक्रिया मान ली गई? जो भी हो, इस ‘अद्भुत आदेश’ ने मोतिहारी शिक्षा विभाग को फिर से सुर्खियों में ला दिया है — और इस बार भी वजह शर्मनाक है, चौंकाने वाली है।
गौरतलब है कि जब तक फाइलों और आंकड़ों पर आधारित कार्यशैली में संवेदनशीलता और सटीकता नहीं जोड़ी जाएगी, तब तक ऐसे अजब-गजब कारनामे सामने आते रहेंगे। शिक्षा का मंदिर चलाने वाला विभाग जब ऐसे हास्यास्पद भूलें करेगा, तब सुधार की उम्मीद भी एक मज़ाक बनकर रह जाएगी।

