भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण (सावन) मास गुरुवार, 30 जुलाई से शुरू हो गया है। श्रावण महीना 28 अगस्त तक है। सावन महीना इस साल 31 दिन का है, जिसमें 4 सोमवार पड़ेंगे और इस दौरान 2 ग्रहण भी लगेंगे।
ग्रहण की तिथियां और समयसूर्य ग्रहण:
12 अगस्त 2026 (बुधवार) को रात 9:04 बजे से देर रात 1:28 बजे तक (हरियाली अमावस्या के दिन)।चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को सुबह 6:54 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक (रक्षाबंधन के दिन)।
भारत पर प्रभाव और नियमभारत में दृश्यता:
ये दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे।सूतक काल: भारत में नजर न आने के कारण इनका सूतक काल और धार्मिक पाबंदियां यहां मान्य नहीं होंगी।पूजा-पाठ और त्योहार: शिव आराधना, मंदिर के कपाट और रक्षाबंधन जैसे सभी पर्व बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से मनाए जाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का पूरा महीना शिव आराधना, जलाभिषेक, व्रत और मंत्र जाप के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से पूजा कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
सावन के पहले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें। श्रद्धा अनुसार दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए पहले से आवश्यक सामग्री तैयार रखना बेहतर माना जाता है। इसमें गंगाजल, स्वच्छ जल, बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत, रोली, मौली, धूप, दीप, कपूर, प्रसाद, फल तथा पंचामृत शामिल किए जा सकते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने, क्रोध और नकारात्मक व्यवहार से बचने तथा नियमित रूप से शिव आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार व्रत, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

