पूर्व मध्य रेल में कवच 4.0 का विस्तार, अब 256.3 रूट किलोमीटर क्षेत्र हुआ सुरक्षित
भारतीय रेल ने रेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कवच वर्जन 4.0 (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) को तीन नए रेलखंडों पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। इसके साथ ही 163 रूट किलोमीटर रेलमार्ग कवच सुरक्षा प्रणाली के दायरे में आ गया है।
नव शामिल रेलखंडों में सरमाटांर-निमियाघाट (76 किमी), फ्लाईओवर केबिन-भभुआ रोड (43 किमी) तथा सासाराम-फेसर (44 किमी) सेक्शन शामिल हैं। ये सभी रेलखंड पूर्व मध्य रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल के अंतर्गत आते हैं।
इस नई उपलब्धि के बाद पूर्व मध्य रेल में कवच 4.0 का कुल कवरेज बढ़कर 256.3 रूट किलोमीटर हो गया है। इसमें पहले से चालू मानपुर-सरमाटांर (93.3 किमी) रेलखंड भी शामिल है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, फेसर-सासाराम सेक्शन पर कवच युक्त पहली ट्रेन 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का सफल संचालन किया गया। वहीं भभुआ रोड से पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच भी कवच प्रणाली के तहत ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है।
पूर्व मध्य रेल में कुल 4,238 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली स्थापित करने का कार्य जारी है। इसमें दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड ट्रंक रूट का महत्वपूर्ण पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन-प्रधानखंटा सेक्शन भी शामिल है, जहां यात्री और मालगाड़ियों का भारी आवागमन होता है।
क्या है कवच 4.0?
कवच 4.0 भारतीय रेलवे की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का सबसे उन्नत संस्करण है। इसे अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा अनुमोदित किया गया है और यह वैश्विक SIL-4 सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्य करता है।
यह प्रणाली जीपीएस, रेडियो संचार और माइक्रोप्रोसेसर तकनीक की मदद से ट्रेनों की निगरानी करती है। यदि एक ही ट्रैक पर निर्धारित दूरी के भीतर दूसरी ट्रेन मौजूद होती है, तो यह लोको पायलट को चेतावनी देती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाकर दुर्घटना की आशंका को समाप्त कर देती है।
कवच प्रणाली सिग्नल उल्लंघन (SPAD), आमने-सामने, पीछे से तथा साइड टक्कर जैसी दुर्घटनाओं को रोकने में सक्षम है। इसके अलावा यह ओवरस्पीडिंग की निगरानी, कम दृश्यता में सुरक्षित संचालन तथा लेवल क्रॉसिंग संबंधी अलर्ट भी प्रदान करती है।
भारतीय रेलवे का मानना है कि कवच 4.0 का विस्तार देश में सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर रेल नेटवर्क के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे ट्रेन संचालन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और लाखों यात्रियों की यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित हो सकेगी।

