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Jharkhand के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन घोटाला मामले में CM के खिलफ ED सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई है बता दें कि हेमंत सोरेन की जमानत के ख़िलाफ ED ने SC में चुनौती दी है। ED ने हाईकोर्ट के जमानत के आदेश को गैरकानूनी बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं
विदित हो कि इस मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। वहीं इस निर्णय पर ED ने कहा है कि हाईकोर्ट की टिप्पणी पक्षपातपूर्ण है। हेमंत सोरेन को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि पूर्व सीएम के खिलाफ ठोस सबूत नहीं है। जमानत याचिका पर 13 जून को सुनवाई पूरी हो चुकी थी। ईडी की ओर से वकील एसवी राजू ने हेमंत सोरेन की जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन्हें जमानत मिली तो वे राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
Jharkhand में हेमंत सोरेन ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली
इधर जमानत के बाद 4 जुलाई को JMM के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने jharkhand राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी जबकि एक दिन पहले ही 3 जुलाई को चंपई सोरेन ने झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
5 माह बाद जेल से रिहा हुए थे हेमंत
गौरतलब है कि हेमंत सोरेन को 28 जून को कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। जमानत मिलने के बाद सोरेन 5 माह बाद जेल से रिहा हुए थे। ED ने 31 जनवरी को सोरेन को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से कुछ समय पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
जेल से आते ही CM की शपथ लेकर राज्य की कमान संभालना एक रणनीति
झारखंड में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है ऐसे में हेमंत सोरेन का जेल से बाहर आना और आते ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए राज्य की कमान संभालना JMM की रणनीति का एक हिस्सा हो सकती है। वहीं गठबंधन में सब के लिए कैबिनेट मंत्री देकर हेमंत विधानसभा चुनाव में अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है।
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में 76 विधायक हैं। वर्तमान में सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने राज्यपाल को 44 विधायकों की समर्थन सूची सौंपी थी।
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