पलामू की पहचान थे ज्योति प्रकाश जी, समाज सेवा ही उनका जीवन था — मेयर अरुणा शंकर

KK Sagar
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मेदिनीनगर : मेयर अरुणा शंकर ने अपने पूज्य ससुर स्वर्गीय ज्योति प्रकाश जी की 30वीं पुण्यतिथि पर भावुक शब्दों में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन समाज सेवा, शिक्षा, संस्कृति और जनकल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि आज वह समाज सेवा के क्षेत्र में जो कुछ भी कर पा रही हैं, वह सब पापा जी के आशीर्वाद, संस्कार और सेवाभाव की सीख का ही परिणाम है।

अरुणा शंकर ने कहा कि स्वर्गीय ज्योति प्रकाश जी केवल एक सफल व्यवसायी नहीं थे, बल्कि पलामू की सामाजिक चेतना को नई दिशा देने वाले दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। उस समय जब टीबी जैसी बीमारी को लोग छुआछूत समझकर मरीजों से दूरी बना लेते थे, तब उन्होंने सदर अस्पताल में टीबी वार्ड का निर्माण कराकर मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। उनके इस प्रयास से हजारों गरीब और बेसहारा मरीजों को उपचार और सम्मान मिला।

उन्होंने बताया कि पलामू के युवाओं की शिक्षा को लेकर भी ज्योति प्रकाश जी बेहद गंभीर थे। जब कॉमर्स की पढ़ाई के लिए छात्रों को रांची और पटना जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था, तब उन्होंने स्थानीय स्तर पर जनता शिवरात्रि कॉलेज की स्थापना कर शिक्षा के नए द्वार खोले। इसके साथ ही छोटे बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आनंद शंकर रोटरी स्कूल की नींव रखी, जो आज भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

अरुणा शंकर ने कहा कि स्वर्गीय ज्योति प्रकाश जी कला, संगीत और साहित्य के भी बड़े संरक्षक थे। उन्होंने डालटनगंज में मोहन सिनेमा हॉल का निर्माण कराया और उस दौर में शहरवासियों को सांस्कृतिक समृद्धि से जोड़ने का कार्य किया, जब मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साधन बेहद सीमित थे। उन्होंने पद्मश्री उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, किशन महाराज, सितारा देवी, शोभा गुर्टू और अन्य कई महान कलाकारों को डालटनगंज बुलाकर यहां के लोगों को शास्त्रीय संगीत और कला की अनमोल विरासत से परिचित कराया।

उन्होंने अंत में कहा कि आज उनकी 30वीं पुण्यतिथि पर पूरा परिवार और समाज उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराता है। “पापा जी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके आदर्श और उनका आशीर्वाद सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।

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