“शरण में आए व्यक्ति की हत्या पाप…”, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बाबा बागेश्वर का बयान

Reena Sharma
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बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में बीते 17 जून को हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब देश के मशहूर आध्यात्मिक गुरु और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ़ बाबा बागेश्वर की एंट्री हो गई है। भरत तिवारी के एनकाउंटर पर उन्होंने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपराधी भी हो तो उसे दंड न्यायपालिका से मिलना चाहिए, न कि सरेंडर करने के बाद उसकी जान ली जानी चाहिए। उन्होंने इसे देश के कानून और सनातन शास्त्रों के विरुद्ध बताया। 

सनातन और हिंदुत्व के लिए काम करने वाला बालक

बाबा बागेश्वर ने कहा है कि वह भरत तिवारी के परिजनों से मिलने उनके गांव जाएंगे। उन्होंने भरत तिवारी को सनातन और हिंदू समाज के लिए काम करने वाला युवा बताया। बाबा का कहना है कि समाज के लिए काम करने वाले व्यक्ति की मौत को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष जवाब मिलना चाहिए और पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

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भरत तिवारी एनकाउंटर को बताया महापाप

बागेश्वर धाम ने एनकाउंटर के बाद भोजपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने रामचरितमानस और सनातन परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि जो व्यक्ति कानून या व्यवस्था की शरण में आ जाए, उसे मारना महापाप की श्रेणी में आता है।

धीरेंद्र शास्त्री ने पठाया रामायण का पाठ

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, जब विभीषण ने भगवान राम की शरण ली थी, तो क्या उनका वध किया गया था? नहीं न। वह तो शत्रु (रावण) के भाई थे, फिर भी प्रभु ने उन्हें गले लगाया। हमारा सनातन, हमारे वेद, शास्त्र और रामायण सभी यही कहते हैं कि यदि कोई शरण में आए तो उसका वध नहीं किया जाता। भरत तिवारी ने जब फेसबुक लाइव पर आकर सबके सामने सरेंडर कर दिया था, तो उसके बाद उस पर गोलियां बरसाना किसी भी कीमत पर उचित नहीं था। यह घोर पाप है।

क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद?

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद बना हुआ है। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 32 वर्षीय भरत भूषण तिवारी इलाके में फैले स्थानीय भ्रष्टाचार, भू-माफियाओं, जमीन विवाद और जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाते थे। इस मामले में पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया पर हथियार लहराने और धमकी देने का वीडियो वायरल होने के बाद टीम उन्हें पकड़ने गई थी, जहां हुई मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद पहले उनको आरा सदर अस्पताल में इलाज कराया गया और फिर वहां से रेफर होने के बाद इलाज के दौरान पीएमसीएच में उनकी मौत हो गई। वहीं, परिजनों और चश्मदीदों का कहना है कि भरत ने फेसबुक लाइव आकर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें गोली मारी गई।

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