चांडिल-राजखरसवां लीलो परियोजना को केंद्र की मंजूरी, दूर होगा बिजली संकट, खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क/जमशेदपुर :झारखंड के औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा ट्रांसमिशन लाइन के चांडिल-राजखरसवां लीलो 132 केवी डीसी निर्माण को केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने स्टेज वन की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब क्षेत्र में सालों से चली आ रही बिजली की आंख-मिचौली और लो-वोल्टेज की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने का रास्ता साफ हो गया है।

​लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग से मिलेगी मुक्ति
​इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कांड्रा में नवनिर्मित 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन को बिजली आपूर्ति से जोड़ना है। लाइन चालू होते ही कांड्रा, गम्हरिया और इसके आसपास के विशाल औद्योगिक व ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की ट्रिपिंग (बार-बार कटने) और लो-वोल्टेज की समस्या पूरी तरह दूर हो जाएगी।

रोजगार के बढ़ेंगे अवसर: सरायकेला झारखंड का एक प्रमुख औद्योगिक हब है। निर्बाध और चौबीसों घंटे बिजली मिलने से न सिर्फ मौजूदा फैक्ट्रियों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि नए उद्योगों की स्थापना होगी जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

Advertisement

पर्यावरण का रखा गया है खास ख्याल, नहीं कटेंगे पूरे जंगल
​यह पूरी परियोजना सरायकेला फॉरेस्ट डिवीजन के अंतर्गत आती है। चूंकि यह रूट दलमा वन्यजीव अभयारण्य से महज 8.2 किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए केंद्र सरकार ने इसके लिए बेहद कड़े और पर्यावरण-अनुकूल नियम तय किए हैं।

सीमित कटाई: पूरी लाइन के लिए 27 मीटर का राइट ऑफ वे तय है। तारों के ठीक नीचे सुरक्षा मानकों के तहत सिर्फ पेड़ों की छंटाई या सीमित कटाई होगी, जिससे जंगल खंडित न हो।

वन्यजीवों की सुरक्षा: ट्रांसमिशन तारों के बीच की दूरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उड़ने वाले पक्षियों और वन्यजीवों के मूवमेंट में कोई बाधा न आए।

कम से कम जमीन का उपयोग: इस रूट में कुल 10 टावर आने हैं, जिनमें से 6 टावर वन क्षेत्र में होंगे। इनके फाउंडेशन के लिए महज 10 \times 10 मीटर के छोटे क्षेत्र का ही उपयोग किया जाएगा।

मुआवजा और पर्यावरण संरक्षण का वादा
​झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड ने वन विभाग को आश्वासन दिया है कि अधिनियम के तहत डायवर्ट की गई वन भूमि के बदले पर्यावरण को होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई वर्तमान जमीनी मूल्य के अनुसार की जाएगी। इसके अलावा, जल और मृदा संरक्षण के लिए संबंधित वन क्षेत्रों में कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान भी लागू किया जाएगा।

Share This Article