डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के चाईबासा कोऑपरेटिव बैंक से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सिस्टम और सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। बैंक में खाताधारकों की गाढ़ी कमाई और सरकारी मदद पर डाका डालने का खेल चल रहा था। हद तो तब हो गई जब जालसाजों ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर न सिर्फ एक मृतक के नाम पर आया लाखों का मुआवजा साफ कर दिया, बल्कि एक बेबस बुजुर्ग महिला की वृद्धावस्था पेंशन तक नहीं छोड़ी। पुलिस और बैंक प्रबंधन की सुस्ती के बाद जब मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय पहुंचा, तब जाकर कोर्ट के कड़े आदेश पर सदर थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीड़ित पिछले 3 साल से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे।
मुर्दा पिता के नाम पर फर्जी बेटे बनकर उड़ाया जमीन का मुआवजा
पहला मामला तांतनगर थाना क्षेत्र के इलीगढ़ा गांव का है। शिकायतकर्ता अमृत लाल कालुंडिया ने जो आरोप लगाए हैं, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं।
अमृत लाल के दिवंगत पिता स्व. मानसिंह कालुंडिया की जमीन स्वर्णरेखा परियोजना के लिए अधिग्रहित हुई थी। इसका भारी-भरकम मुआवजा बैंक में आया था। गांव के ही तीन दबंगों—दिनेश कालुंडिया, मिरेन कालुंडिया और सुजीत कालुंडिया ने बैंक प्रबंधन से सांठगांठ की। इन लोगों ने दस्तावेजों पर अपनी तस्वीरें लगाई, नाम बदले और खुद को स्व. मानसिंह का बेटा बताकर फर्जी खाता खुलवा लिया। फर्जी खाता खुलते ही मुआवजे की पूरी रकम निकाल ली गई। जब असली वारिस ने इसका विरोध किया, तो उसे मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई।
वहीं दूसरा मामला चाईबासा के मटकमहातु की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला जेमा कुई का है। यह मामला दिखाता है कि जालसाजों और बैंक कर्मियों के हौसले कितने बुलंद थे। जेमा कुई की जानकारी और मौजूदगी के बिना ही उनके खाते से वृद्धावस्था पेंशन और जमा पूंजी की अवैध निकासी की जाती रही। यह खेल जून 2022 से नवंबर 2024 के बीच लगातार चला। जब पीड़िता ने इस पर हंगामा किया, तो मामले को रफा-दफा करने के लिए सी. बोदरा नामक एक बिचौलिए ने चुपके से उसके खाते में 7 हजार रुपये डाल दिए, ताकि बुजुर्ग महिला डर जाए और आगे शिकायत न करे। कुल मिलाकर करीब 45 हजार रुपये की अवैध निकासी का अनुमान है।
रडार पर बैंक के बड़े अधिकारी, जांच शुरू
अदालत के सख्त रुख के बाद अब इस पूरे नेक्सस (सांठगांठ) पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इस महाघोटाले में सीधे तौर पर बैंक के तत्कालीन स्टाफ को आरोपी बनाया गया है।
किन पर गिरी गाज?
तत्कालीन शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर): राबिया भगत
बैंक के तत्कालीन कैशियर
मिलीभगत में शामिल अन्य बैंक कर्मी और बिचौलिए
सदर थाना पुलिस ने कोर्ट के निर्देश पर दोनों मामलों में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब बैंक के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और फर्जी खातों के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रही है।

