बिहार के लखीसराय में NEET सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़,5 मेडिकल छात्र समेत 24 गिरफ्तार

Neelam
By Neelam
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG की परीक्षा दोबारा कराई गई। रविवार को हुए री-एग्जाम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा कड़ी थी। बायोमीट्रिक सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कुछ जगहों पर परीक्षा में सेंध लगाने की कोशिशें सामने आईं। पुख्ता सुरक्षा दावे के बीच लखीसराय में पुलिस ने बड़े सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ किया।

गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कामयाबी

घटना की शुरुआत तब हुई जब लखीसराय के एसडीएम शिवम कुमार को गुप्त सूचना मिली कि बाहरी जिलों से कुछ डमी कैंडिडेट लखीसराय पहुंच रहे हैं और वे नीट परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया। ​इसी दौरान हसनपुर परीक्षा केंद्र पर एक परीक्षार्थी पर पुलिस को शक हुआ जब वह केंद्र में प्रवेश कर रहा था।

एक-एक कर 24 लोग चढ़े पुलिस के हत्थे

कड़ाई से पूछताछ करने पर उस परीक्षार्थी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह असली परीक्षार्थी की जगह परीक्षा में बैठने आया है। बस यहीं से इस बड़े सॉल्वर गैंग की कड़ियां जुड़ती चली गईं और एक-एक करके 24 लोग पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

आरोपियों में 5 मेडिकल छात्र भी शामिल

जानकारी के अनुसार जिले के चार केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई थी। इनमें केंद्रीय विद्यालय, उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके उच्च विद्यालय और डायट लखीसराय शामिल थे। जांच के दौरान केंद्रीय विद्यालय से सात, हसनपुर से एक और केआरके स्कूल से एक फर्जी परीक्षार्थी को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों को तब शक हुआ जब दस्तावेजों, फोटो और फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद व्यापक जांच शुरू की गई और पूरा मामला सामने आ गया। अब तक इस मामले में 5 मेडिकल छात्र समेत 24 को गिरफ्तार किया गया है।

40 लाख रुपये तक की डील का खुलासा

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई अभ्यर्थियों और सॉल्वरों के बीच लाखों रुपये का सौदा हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार कुछ मामलों में परीक्षा पास कराने के लिए करीब 40 लाख रुपये तक की डील की गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन अभ्यर्थियों ने पैसे देकर दूसरे लोगों को अपनी जगह परीक्षा में बैठाया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। यह मामला केवल नकल या फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक संगठित परीक्षा माफिया नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है।

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