आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुधाकर सिंह ने रिशु श्री मामले को लेकर सरकार को घेरते हुए दावा किया कि शिक्षा विभाग में पिछले कई वर्षों से बड़े स्तर पर घोटाले होते रहे हैं। उन्होंने आनंद किशोर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वे सबसे बड़े माफिया हैं।
बीएसईबी में घोटाले का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की पार्टी से सांसद बने सुधाकर सिंह ने सोमवार को पटना में प्रेस वार्ता की। उन्होंने बिहार बोर्ड, री-नीट एग्जाम समेत कई मुद्दों को उठाया। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) में वर्ष 2017 से अब तक हुए प्रशासनिक, वित्तीय और संविदा संबंधी फैसलों की व्यापक जांच की मांग उठाई है। सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का वार्षिक बजट वर्ष 2017 से पहले लगभग 10 करोड़ रुपये था, जो बाद में बढ़कर करीब 700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि किन मदों में खर्च की गई, उसका वित्तीय सत्यापन किसने किया और अब तक उसकी स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2017 से अब तक के सभी ऑडिट, भुगतान विवरण, निविदा दस्तावेज और संविदा संबंधी अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं।
रिशु श्री मामले को लेकर आनंद किशोर को घेरा
सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सांसद सुधाकर सिंह ने विवादों में चल रहे रिशु श्री मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि रिशु श्री को सबसे पहले सरकारी टेंडर दिलाने का काम आनंद किशोर ने ही किया था। इसी टेंडर के बाद से शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी शुरू हुई।
शिक्षा व्यवस्था बर्बाद करने में आनंद किशोर की भूमिका-सुधाकर सिंह
मीडिया से बातचीत में सुधाकर सिंह ने कहा, आनंद किशोर सबसे बड़े माफिया हैं। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने और घोटालों का नेटवर्क खड़ा करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में आयोजित कई परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं और टॉपर घोटाले जैसी घटनाएं भी इसी व्यवस्था का हिस्सा रही हैं।
आनंद किशोर के विदेश यात्रा पर उठाए सवाल
आरजेडी सांसद ने कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय किसी मामले में जांच कर रहा है तो यह स्पष्ट किया जाए कि जांच अवधि के दौरान उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई। उन्होंने यह भी मांग की कि उनकी विदेश यात्राओं, यात्रा के उद्देश्य और संबंधित स्वीकृतियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि वित्त विभाग के प्रधान सचिव पद से उन्हें हटाने और बाद में दूसरे महत्वपूर्ण विभाग में तैनाती के पीछे क्या कारण थे।
कई अधिकारी अब तक जांच के दायरे से बाहर
सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों के लिए जिम्मेदार कई अधिकारी अब तक जांच के दायरे से बाहर हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने फाइलों पर स्वीकृति दी या वित्तीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

