‘भूमिहार’ पर बिहार विधानसभा में रार, बीजेपी विधायकों ने ही डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव को घेरा

Neelam
By Neelam
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बिहार विधानसभा के मानसून सत्र 2026 के आखिरी दिन डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव सत्ताधारी विधायकों से ही घिर गए। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सरकारी दस्तावेजों और जनगणना में भूमिहार की जगह “भूमिहार ब्राह्मण” दर्ज किए जाने की मांग उठाई। उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इसे विचाराधीन बता दिया। इसके बाद सदन में बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा समेत इस समाज के तमाम विधायक भड़क गए, जिसमें सत्ताधारी सदस्य भी थे।

‘भूमिहार ब्राह्मण’ लिखने से भ्रम की स्थिति

जाले से भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मांग उठाई कि सरकारी अभिलेखों और जनगणना में केवल “भूमिहार” के बजाय “भूमिहार ब्राह्मण” लिखा जाए। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि ‘भूमिहार ब्राह्मण’ का उल्लेख राज्य सरकार के पुराने गजटों और जनगणना के अभिलेखों में मिलता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 1931 की जनगणना का हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से ‘भूमिहार ब्राह्मण’ दर्ज है। इसके बावजूद राज्य सरकार के कागजातों पर इस जाति के अलग-अलग नाम हैं और इसके कारण परेशानी हो रही है। जीवेश मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार के कुछ दस्तावेजों में ‘भूमिहार ब्राह्मण’ और कुछ में केवल ‘भूमिहार’ लिखा होने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि जब बिहार के छात्र या अन्य लोग दूसरे राज्यों, विशेषकर दिल्ली, जाते हैं, तो वहां उनके जाति प्रमाणपत्र को लेकर आपत्ति की जाती है और उन्हें प्रमाणपत्र में सुधार कराने के लिए बिहार वापस भेज दिया जाता है। इससे लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

बिजेंद्र यादव के जवाब से असंतुष्ट दिखे भूमिहार ब्राह्मण विधायक

इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि भूमिहार के साथ ब्राह्मण जोड़ने से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के समक्ष इस संबंध में कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। मंत्री के इस जवाब से सत्ता पक्ष के भूमिहार समाज से जुड़े विधायक संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने सदन में विरोध दर्ज कराया।

तरारी से भाजपा विधायक ने भी दिखाए तेवर

बहस के दौरान तरारी से भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने एक कदम आगे बढ़ते हुए भूमिहार समाज को ट्राइब (जनजाति) श्रेणी में शामिल करने की मांग उठाई। उनकी इस मांग के बाद सदन में कुछ देर के लिए शोर-शराबे की स्थिति बन गई। कई विधायकों ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। इसी दौरान विभिन्न सरकारी भर्तियों में अनुसूचित जाति वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी विधानसभा में गूंजा।

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