सोनम वांगचुक के अनशन पर शिवानंद तिवारी ने जताई चिंता, सरकार के साथ विपक्ष को भी घेरा

Neelam
By Neelam
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 19वें दिन भी जारी है। लंबे समय से जारी इस हड़ताल के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट गया है। डॉक्टर्स उपवास के कारण वांगचुक में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाने की आशंका जता रहे हैं। उपवास के दौरान सोनम को देशभर के लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। इस बीच बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने भी अपना समर्थ देते हुए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को घेरा है। वहीं, विपक्ष को एकजुट होने की अपील की है।

देश के तमाम विपक्षी दलों से साथ आने की अपील

शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक और अनिश्चित काली उपवास कर रहे नौजवान को अकेला मत छोड़िए।शिवानंद तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की इस आवाज़ के साथ देश के तमाम विपक्षी दलों को खड़ा होना चाहिए।

सरकार की उदासीनता चिंताजनक-शिवानंद तिवारी

वांगचुक के आनशन का आज 19वां दिन है। इस पर शिवानंद तिवारी ने कहा कि, दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े तथा लद्दाख से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सोनम वांगचुक और उनके साथी लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इतने दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से जिस प्रकार की उदासीनता दिखाई जा रही है, वह चिंताजनक है। धीरे धीरे उपवास कर्मियों की हालत भी बिगड़ जा रही है।

उनकी मांगें असंगत या अव्यावहारिक नहीं -शिवानंद तिवारी

उन्होंने आगे लिखा है, सोनम वांगचुक कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता कहिए, वैज्ञानिक कहिए या जननेता, इतना निश्चित है कि वे असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने लद्दाख जैसे कठिन भूभाग में बर्फ से कृत्रिम हिमनद (आइस स्तूप) बनाकर सिंचाई की नई व्यवस्था विकसित की, सैनिकों के लिए ऐसे आवासों के निर्माण में योगदान दिया, जहां बाहर की तुलना में तापमान अधिक अनुकूल रहता है। उनके कार्यों से प्रेरित होकर लोकप्रिय फिल्में भी बनीं। उनकी मांगें असंगत या अव्यावहारिक नहीं हैं। 

देश और लोकतंत्र के लिए ये शुभ संकेत नहीं-शिवानंद तिवारी

शिवानंद तिवारी ने आगे कहा कि आज देश की राजनीति जिस दिशा में जा रही है, वह लोकतंत्र और राष्ट्रीय हित- दोनों के लिए चिंता का विषय है। आज राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा लोगों को धर्म और समुदाय के आधार पर बांटने पर केंद्रित दिखाई देता है। हिंदुओं को डर दिखाकर और मुसलमानों के प्रति नफ़रत पैदा करके राजनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास न तो लोकतांत्रिक समाज के लिए और ना ही देश के लिए शुभ संकेत है। 

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