जमशेदपुर के आसमान में ‘सोनिक बूम’: कलाईकुंडा से उड़े फाइटर जेट्स ने थमा दी शहर की रफ्तार, जानें क्यों हुई लो-फ्लाइंग?

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में गुरुवार की सुबह किसी सामान्य दिन की तरह शुरू हुई थी, लेकिन सुबह 11:25 बजे आसमान से उतरी एक भीषण गर्जना ने पूरे शहर को चौंका दिया। एक के बाद एक दो फाइटर जेट्स ने शहर के हवाई क्षेत्र में इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरी कि घरों की खिड़कियां तक थरथरा उठी। जब तक लोग छतों की ओर दौड़ते, जेट्स ओझल हो चुके थे, पीछे छोड़ गए तो बस अपनी गूंज और ढेरों सवाल।

ऑपरेशन सिंदूर की यादें हुई ताजा
​शहरवासियों के लिए यह मंजर नया नहीं था। जो लोग रात की खामोशी में जागने के आदी हैं, उन्हें मई 2025 का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ याद आ गया। उस दौरान भी रात के करीब 1 बजे इसी तरह की भीषण गर्जना ने जमशेदपुर को जगाया था। गुरुवार की इस घटना ने एक बार फिर सामरिक हलचल की यादें ताजा कर दी हैं।

कलाईकुंडा एयरबेस से शुरू हुआ ‘मिशन’
​मिली जानकारी के अनुसार ये दोनों लड़ाकू विमान पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरबेस से उड़े थे। यह कोई आपातकालीन स्थिति नहीं, बल्कि एक ‘टेक्टिकल ट्रेनिंग सॉर्टी’ थी। सामान्यतः ऐसी ट्रेनिंग में विमान 250 से 500 फीट की ऊंचाई पर होते हैं। विशेष परिस्थितियों में ये जांबाज पायलट महज 100 फीट (30 मीटर) की ऊंचाई तक भी विमान ले आते हैं।

दुश्मन की रडार को ‘अंधा’ करने का अभ्यास
​आखिर शहर के ऊपर इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने की जरूरत क्या है? इसके पीछे भारतीय वायुसेना की सोची-समझी रणनीति होती है।
​नेप ऑफ द अर्थ (NOE): इसे जमीन से सटकर उड़ना कहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के रडार को चकमा देना है। पहाड़ों और पेड़ों की ओट लेकर उड़ने से विमान रडार की पकड़ में नहीं आते।
​सरप्राइज अटैक: कम ऊंचाई और तेज रफ्तार दुश्मन को संभलने का मौका नहीं देती।
​सोनिक बूम का असर: जब जेट सुपरसोनिक गति से चलते हैं, तो ‘सोनिक बूम’ पैदा होता है। इन विमानों का शोर 130 से 150 डेसिबल तक पहुंच जाता है, जो किसी एम्बुलेंस सायरन या सामान्य शोर से कई गुना घातक होता है।

प्रशासन को थी पहले से जानकारी
​टाटा स्टील के एविएशन चीफ रवि राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि यह वायुसेना की एक नियमित अभ्यास उड़ान थी। उन्होंने बताया कि सोनारी एयरपोर्ट और संबंधित अधिकारियों को इस लो-फ्लाइंग ट्रेनिंग के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था।

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