ED डायरेक्टर बनकर भोजपुर डीएम को धमकाने वाला गिरफ्तार, चार साल पहले डीजीपी को लिया था झांसे में

Reena Sharma
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बिहार में बड़े अधिकारियों को झांसे में लेकर जालसाजी की कोशिश करने वाला शातिर आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। खुद को कभी हाईकोर्ट का जज तो कभी केंद्रीय एजेंसी का शीर्ष अधिकारी बताने वाले अभिषेक अग्रवाल को एक बार फिर पुलिस ने दबोच है। इस बार उसने भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया को निशाना बनाने की कोशिश की थी।

खुद को ‘ईडी डायरेक्टर’ बताकर डाला दबाव

आरोपी ने खुद को नई दिल्ली का ‘ईडी डायरेक्टर’ बताकर डीएम को कई बार कॉल किया और रसूख का दबाव बनाकर उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश की। इस मामले में कार्यवाई करते हुए एसटीएफ, भोजपुर और पटना पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।

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सरकारी मोबाइल नंबर पर कई बार व्हाट्सप्प कॉल किए

भोजपुर के डीएम तनय सुल्तानिया को अपने प्रभाव में लाने के लिए ठग अभिषेक ने डीएम के सरकारी मोबाइल नंबर पर कई बार व्हाट्सप्प कॉल किए। प्रवर्तन निदेशालय का डायरेक्टर बनकर उसने विभागीय मामलों में अपनी धौंस जमाने की कोशिश की और डीएम पर बेवजह दबाव डाला। हालांकि, उसकी बातों पर डीएम को शक हो गया। इसके बाद उनके दफ्तर के एक कर्मचारी रोहित कुमार ने 28 अप्रैल को आरा के नवादा थाने में एक FIR दर्ज कराई। केस दर्ज होते ही पुलिस और STF हरकत में आई और टेक्निकल सर्विलांस का इस्तेमाल करके उसे पटना में पकड़ लिया।

सालों से पुलिस को चकमा दे रहे था

बताया जाता है कि अभिषेक बेहद शातिर दिमाग का खिलाड़ी है। वह लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था, लेकिन आखिरकार उसकी लोकेशन कोतवाली क्षेत्र में ट्रेस हुई और घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वह बुद्धा कॉलोनी के अजय नीलायन अपार्टमेंट का रहने वाला है। 

नकद और मोबाइल बरामद

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अभिषेक के पास से 2.61 लाख रुपये नकद और कई मोबाइल फोन बरामद किए। भोजपुर के नवादा पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें जबरन वसूली से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। इन अपराधों के लिए सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने गुनाह कबूल कर लिए, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

कभी तत्कालीन डीजीपी की “आंखों में धूल झोंका था

चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई पहली वारदात नहीं है। साल 2022 में भी इसी आरोपी ने खुद को संजय करोल बताकर तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को झांसे में लिया था। 2022 में पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल की एक फर्जी प्रोफाइल बनाई थी और बिहार के तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को हफ्तों तक सफलतापूर्वक झांसा दिया था। उस समय उसने व्हाट्सप्प कॉल का इस्तेमाल करके डीजीपी पर दबाव डाला था कि वे गया के तत्कालीन सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस आदित्य कुमार के पक्ष में फैसले लें। उस वक्त आरोपी के प्रभाव में आकर डीजीपी तक उसे ‘सर’ कहकर संबोधित करते थे। बाद में मामला खुला तो आर्थिक अपराध इकाई ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन तीन साल पहले उसे जमानत मिल गई थी।

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