​लापरवाही पड़ी भारी: पुलिस कार्रवाई न होने से भड़का आदिवासी समाज, दिया बंद का अल्टीमेटम

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : आस्था के केंद्र से हुई छेड़छाड़ और विरोध करने वाले युवाओं की पिटाई के मामले में पुलिस की ढिलाई अब पूरे कोल्हान क्षेत्र के लिए बड़ी मुसीबत बनने जा रही है। मझगांव के पंडुकी गांव स्थित पवित्र देशाउली स्थल पर हुई गुंडागर्दी और उस पर प्रशासनिक सुस्ती से भड़के आदिवासी संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। घटना के 72 घंटे बाद भी ठोस कार्रवाई न होने से नाराज विभिन्न संगठनों ने 27 जुलाई को कोल्हान बंद का बड़ा ऐलान कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?
​चाईबासा के अर्जुना हॉल में गुरुवार को देशाउली फाउंडेशन और कोल्हान आदिवासी युवा शक्ति समेत कई संगठनों की एक अहम बैठक हुई। बैठक में वक्ताओं ने खुलकर आरोप लगाया कि पंडुकी स्थित देशाउली स्थल पर असामाजिक तत्वों का दबदबा बढ़ता जा रहा था। वहां खुलेआम नशाखोरी और अड्डेबाजी की जा रही थी। जब स्थानीय आदिवासी युवाओं ने अपनी पवित्र परंपराओं और स्थल की गरिमा की रक्षा के लिए इसका विरोध किया, तो उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।

पुलिसिया रवैये से उपजा जन-आक्रोश
​संगठनों का कहना है कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस ने आरोपियों पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। इस ढुलमुल रवैये से समाज में भारी निराशा और गुस्सा है। आक्रोश का आलम यह है कि गांव-गांव में स्वतःस्फूर्त ग्राम सभाएं बुलाई जा रही हैं, जहां बाहरी तत्वों की एंट्री और उनके व्यापार पर कड़े प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े फैसले लिए जा रहे हैं।

27 जुलाई को चाईबासा समेत पूरे कोल्हान में बंद का आह्वान
​बैठक में मौजूद नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर समय रहते आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो 27 जुलाई को पूरे कोल्हान प्रमंडल में लोकतांत्रिक तरीके से पूर्ण बंद रखा जाएगा। आंदोलन के दौरान बनने वाली किसी भी स्थिति या संभावित अव्यवस्था की पूरी ज़िम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहर और पूजनीय स्थलों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या हमलों को अब और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

Share This Article