जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में सख्ती: अब वार्ड से बाहर घूमना आसान नहीं, गाइनिक वार्ड में लागू हुआ ड्रेस कोड और नया नियम

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एक सख्त कदम उठाया है। अब अस्पताल के गायनिक विभाग में भर्ती होने वाली महिला मरीजों के लिए एक निश्चित ड्रेस कोड अनिवार्य कर दिया गया है।

सुरक्षा और पहचान को लेकर लिया गया फैसला
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि आम कपड़ों में रहने के कारण मरीजों और उनके परिजनों की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता था। नए नियमों के तहत अब वार्ड की हर महिला मरीज को अस्पताल द्वारा तय किए गए विशेष परिधान में ही रहना होगा। इससे सुरक्षा गार्ड और नर्सिंग स्टाफ को दूर से ही मरीजों की सही पहचान करने में आसानी होगी।

बिना अनुमति वार्ड से बाहर जाने पर पूरी तरह पाबंदी
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब कोई भी मरीज डॉक्टर या ऑन-ड्यूटी नर्स की अनुमति के बिना वार्ड की सीमा से बाहर नहीं जा पाएगा। अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने बताया कि कई बार मरीज मना करने के बाद भी वार्ड से बाहर घूमते रहते हैं, जिससे कर्मचारियों को परेशानी होती है और सुरक्षा संबंधी दिक्कतें बढ़ती हैं। अगर कोई मरीज रोकने के बावजूद जबरन बाहर जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की नहीं होगी।

अस्पताल परिसर में टल गया बड़ा हादसा: 3 साल का बच्चा बरामद
इसी बीच अस्पताल परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब गायनिक वार्ड में अपने पति (विश्वजीत मंडल, निवासी कमलपुर) को देखने आई एक महिला का 3 साल का बच्चा अचानक गायब हो गया। गनीमत रही कि अस्पताल की सुरक्षा में तैनात होमगार्ड के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य गेट के बाहर एक संदिग्ध व्यक्ति को बच्चे को ले जाते हुए दबोच लिया। पूछताछ में उस व्यक्ति ने बहाना बनाया कि बच्चा रो रहा था इसलिए वह उसे बिस्कुट दिलाने बाहर ले जा रहा था। होमगार्ड के जवानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया है।

जल्द अन्य विभागों में भी लागू होगी व्यवस्था
एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक ने जानकारी दी है कि गायनिक वार्ड के बाद जल्द ही अस्पताल के बाकी सभी विभागों में भी मरीजों के लिए ड्रेस कोड और नोटिस बोर्ड की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। सभी वार्डों में इस संबंध में नोटिस भी चस्पा किए जा रहे हैं ताकि मरीज और उनके परिजन नियमों से पूरी तरह अवगत रहें।

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