3,353 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, छात्राओं ने 44 गोल्ड मेडल पर जमाया कब्जा
रांची: रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में आयोजित 39वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर जीवन के हर मोर्चे पर संवेदनशीलता और विवेक का परिचय देने का आह्वान किया। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की मौजूदगी में आयोजित समारोह में कुल 3,353 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 58 विद्यार्थियों के बीच कुल 71 गोल्ड मेडल बांटे गए, जिनमें 44 मेडल छात्राओं के नाम रहे।
डिग्री की शुरुआत के बाद अब जीवन की असली परीक्षा
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षा शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि उसे वास्तविक जीवन में उतारने की पहली सीढ़ी है। विश्वविद्यालय से निकलने के बाद विद्यार्थी जीवन की खुली पाठशाला में प्रवेश करेंगे, जहां परिस्थितियां हर पल नए सवाल बनकर सामने आएंगी और उनके निर्णय ही उन सवालों के जवाब होंगे। उन्होंने कहा कि असफलता यात्रा को रोकने वाली दीवार नहीं, बल्कि बेहतर दिशा तलाशने का अवसर है। सफलता में विनम्रता और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की सीख भी उन्होंने विद्यार्थियों को दी।
नौकरी खोजने के बजाय अवसर पैदा करने की अपील
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश की प्रगति केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और मानवीय मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी या अवसर तलाशने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि अपने मौलिक विचारों से नए अवसर पैदा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता मनुष्य को गति देती है, जबकि संस्कृति और परंपराएं उसे सही दिशा दिखाती हैं। विद्यार्थियों को ‘मैंने क्या पाया’ के साथ ‘मैंने समाज को क्या दिया’ का भाव भी जीवन में बनाए रखने की सीख दी।
नई शिक्षा नीति और विश्वविद्यालय के विकास पर जोर
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने स्वागत भाषण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विश्वविद्यालय में लागू चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने विश्वविद्यालय परिसर में करोड़ों की लागत से बने नए पुस्तकालय को विद्यार्थियों को समर्पित करने का उल्लेख किया। उन्होंने दीक्षांत मंडप को अत्याधुनिक ऑडिटोरियम में बदलने का प्रस्ताव भी रखा।
बॉक्स: मानद उपाधियों से सजा इतिहास
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को मानद उपाधियों से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख रहा। 71 गोल्ड मेडल में छात्राओं की 44 मेडल की हिस्सेदारी ने विश्वविद्यालय में महिला विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को एक बार फिर रेखांकित किया।

