डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के बहरागोड़ा में उस समय हड़कंप मच गया जब सुवर्णरेखा नदी के किनारे रेत में दबा हुआ एक विशालकाय जिंदा बम मिला। करीब 227 किलोग्राम वजनी यह बम कोई साधारण विस्फोटक नहीं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौर का बताया जा रहा है। भारतीय सेना ने एक बेहद जटिल और हाई-रिस्क ऑपरेशन के बाद इसे सुरक्षित तरीके से ब्लास्ट कर नष्ट कर दिया है।
सेना का ‘ऑपरेशन सुरक्षा’
इस खतरनाक मिशन को भारतीय सेना की 51 इंजीनियर रेजिमेंट की बम निरोधक टीम ने अंजाम दिया। कैप्टन आयुष कुमार सिंह और नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह के नेतृत्व में टीम ने दो दिनों तक बम की तकनीकी जांच की। विशेषज्ञों ने पाया कि दशकों तक पानी और रेत में दबे रहने के बावजूद इसकी विस्फोटक क्षमता बरकरार थी, जो एक बड़े खतरे का संकेत था।
रेत के बीच हुआ जोरदार धमाका
मंगलवार को तकनीकी कारणों से रुके इस ऑपरेशन को बुधवार को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सेना ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए नदी तट और आसपास के पूरे इलाके को सील कर दिया। आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया। गहरे गड्ढे खोदकर ‘कंट्रोल्ड ब्लास्ट’ (नियंत्रित विस्फोट) की प्रक्रिया अपनाई ताकि आसपास के रिहायशी इलाकों को कोई नुकसान न हो।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया और उसकी गूंज दूर तक सुनी गई।
ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
बम मिलने की खबर के बाद से ही बहरागोड़ा के पानीपड़ा-नागुड़साई क्षेत्र के गांवों में दहशत का माहौल था। प्रशासन ने पहले ही लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी थी। बम के सफलतापूर्वक निष्क्रिय होने के बाद ग्रामीणों ने भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया।
वहीं प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है और अपील की है कि अगर भविष्य में भी ऐसी कोई संदिग्ध वस्तु या पुराना लोहा जैसी दिखने वाली चीज मिले, तो उसे छुए नहीं और तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को सूचित करें।

