64 संदिग्ध SIM कार्ड से खुला साइबर ठगी का नेटवर्क, धनबाद में चार गिरफ्तार; विधि विरुद्ध बालक भी निरुद्ध

KK Sagar
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KYC अपडेट और बैंक खाता बंद होने का झांसा देकर OTP हासिल कर रहे थे आरोपी, 9 संदिग्ध अब भी फरार

धनबाद। साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए धनबाद पुलिस ने चिरकुंडा थाना क्षेत्र में सक्रिय एक साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। दूरसंचार विभाग से मिली सूचना के आधार पर चिरकुंडा स्थित एक POS दुकान से जारी किए गए 64 संदिग्ध SIM कार्ड की जांच की गई। इनमें से 27 SIM कार्ड के खिलाफ NCRP पोर्टल पर साइबर ठगी से संबंधित शिकायत दर्ज मिली। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया गया है। पुलिस के अनुसार गिरोह के नौ अन्य सहयोगी फिलहाल फरार हैं।

KYC अपडेट के नाम पर हासिल करते थे OTP

पुलिस के अनुसार आरोपी UCO बैंक के ग्राहकों को KYC अपडेट कराने अथवा बैंक खाता बंद होने का झांसा देते थे। इसके बाद ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाला OTP हासिल कर बैंक खाते से रकम निकालते थे।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे मोबाइल फोन के जरिए UCO mPassbook और UCO Secure ऐप का इस्तेमाल करते थे। OTP मिलने के बाद खातों से रकम साइबर ठगी के जरिए वॉलेट में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद वॉलेट से रकम निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में उसका बंटवारा कर लेते थे।

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64 संदिग्ध SIM की जांच से सामने आया मामला

ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब के अनुसार दूरसंचार विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना में पता चला कि 1 जनवरी 2026 से 29 मई 2026 के बीच चिरकुंडा थाना क्षेत्र स्थित मुकेश स्टोर POS दुकान से कुल 64 संदिग्ध SIM कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से 27 SIM के खिलाफ NCRP पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज थी।

वरीय अधिकारियों के निर्देश पर निरसा SDPO लिलेश्वर महतो के नेतृत्व में छापेमारी टीम गठित की गई। टीम ने सबसे पहले चिरकुंडा में ICICI बैंक के पास स्थित मुकेश स्टोर पर छापेमारी की, लेकिन दुकान बंद मिली। आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस को दुकान के मालिक मुकेश राय के संबंध में जानकारी मिली।

ID का इस्तेमाल कर खरीदता था SIM

जांच के दौरान पुलिस को चिरकुंडा के लायकडीह निवासी आयुष सिंह के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार आयुष सिंह अपने ID का इस्तेमाल कर कई SIM कार्ड खरीदता था और उन्हें साइबर ठगी करने वाले गिरोह को ऊंची कीमत पर बेचता था।

पूछताछ के दौरान आयुष सिंह ने पुलिस को प्रेम रविदास, विनोद रविदास, गुलाब रविदास और मोहन रविदास समेत साइबर ठगी में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस टीम ने निरसा थाना क्षेत्र के मुगमा से आरोपियों को पकड़ा। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार प्रेम रविदास को गिरोह का मुख्य सरगना बताया जा रहा है।

मोबाइल और बैंक ग्राहकों का डाटा बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने विभिन्न कंपनियों के SIM कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा UCO बैंक से संबंधित ग्राहकों के मोबाइल नंबर और खाता नंबर वाला डाटा भी पुलिस के हाथ लगा है।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बैंक ग्राहकों का डाटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा। साथ ही बड़ी संख्या में SIM कार्ड जारी होने के मामले में संबंधित प्रक्रिया और जिम्मेदारियों की भी जांच की जा रही है।

इन इलाकों में सक्रिय बताया जा रहा साइबर नेटवर्क

पुलिस के अनुसार साइबर गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी निरसा थाना क्षेत्र के तिलतोरीया, गोविंदपुर थाना क्षेत्र के खड़काबाद, कुमारधुबी ओपी क्षेत्र के रविदास टोला और चिरकुंडा थाना क्षेत्र के लायकडीह से सामने आई है।

फिलहाल पुलिस फरार बताए जा रहे नौ आरोपियों की तलाश में जुटी है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना निशाना बनाया और कितनी रकम की साइबर ठगी की गई है।

ग्रामीण एसपी ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने आम लोगों से साइबर अपराध को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति को साइबर अपराध से संबंधित गतिविधि का संदेह हो या वह साइबर अपराध का शिकार हुआ हो, तो संबंधित सरकारी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।

धनबाद पुलिस की इस कार्रवाई के बाद साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की वास्तविक रकम को लेकर भी आगे और खुलासे की उम्मीद है।

सावधान रहें, सतर्क रहें। KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या किसी अन्य बहाने से यदि कोई फोन कर OTP मांगे या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करे, तो ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की जानकारी साझा न करें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही बैंक खाते में जमा रकम पर भारी पड़ सकती है।

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