धनबाद में नंबरों के खेल का नया ठिकाना मोबाइल बुकिंग से घर तक डिलीवरी, कोडवर्ड में लॉटरी कारोबार

Reena Sharma
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मैथन से बरोरा तक नेटवर्क सक्रिय होने का दावा, व्हाट्सऐप बुकिंग और डिलीवरी ने बढ़ायी चिंता

धनबाद. झारखंड में प्रतिबंध के बावजूद धनबाद के सीमावर्ती और कोलियरी इलाकों में अवैध लॉटरी कारोबार का कथित नेटवर्क फैलने की बात सामने आ रही है. मैथन से लेकर बरोरा तक इसके सक्रिय होने का दावा किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से कथित रूप से टिकटों की सप्लाई, स्थानीय स्तर पर छपाई, कोडवर्ड में लेन-देन और व्हाट्सऐप के जरिये नंबरों की बुकिंग की व्यवस्था चल रही है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

गुमटी से आगे बढ़ा खेल, एजेंटों के जरिये गांव-गांव पहुंचने का दावा

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बताया जा रहा है कि कथित कारोबार अब केवल गुमटी और पान दुकानों तक सीमित नहीं है. एजेंटों और पेडलरों के जरिये ग्रामीण इलाकों से बाजारों तक टिकट पहुंचाये जाने के साथ घर और दुकानों तक डिलीवरी की व्यवस्था होने की बात कही जा रही है. सूत्रों के अनुसार, मैथन क्षेत्र में सक्रिय बताये जाने वाले दीपक ग्रुप से अलग बरोरा क्षेत्र में पप्पू नामक व्यक्ति के माध्यम से कोलियरी इलाकों में कथित रूप से कारोबार संचालित होने का दावा है. इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

सीमा पार से कथित सप्लाई, बरोरा में छपाई के दावे ने बढ़ाये सवाल

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे होने के कारण मैथन और आसपास का इलाका कथित नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है. सूत्रों का दावा है कि पश्चिम बंगाल से टिकट धनबाद के अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाये जाते हैं. नागालैंड और सिक्किम की लॉटरी के नाम पर भी टिकट बेचे जाने की चर्चा है. सबसे गंभीर दावा स्थानीय स्तर पर टिकटों की छपाई को लेकर है. सूत्रों के अनुसार, चिरकुंडा और मिहिजाम के बंद पड़े क्वार्टरों व फैक्ट्रियों के अलावा बरोरा के सुनसान स्थानों का इस्तेमाल कथित तौर पर टिकट तैयार करने के लिए किया जा रहा है.

कोडवर्ड से व्हाट्सऐप तक, कथित कारोबार ने बदला तरीका

सूत्रों के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े एजेंट और पेडलर टिकट, नंबर और रकम के लेन-देन के लिए कथित तौर पर कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हैं. इससे कारोबार से जुड़ी जानकारी बाहरी लोगों से छिपाने और नेटवर्क के भीतर पहचान आसान रखने की कोशिश की जाती है. वहीं व्हाट्सऐप के जरिये नंबर बुक किये जाने और मोबाइल पर संपर्क के बाद एजेंटों द्वारा टिकट घर या दुकान तक पहुंचाने की बात सामने आ रही है. इससे ग्राहकों को किसी गुमटी या दुकान तक जाने की जरूरत नहीं पड़ने का दावा है.

टिकट से लेकर डिलीवरी तक की कड़ी, जांच से खुलेगा कथित नेटवर्क का राज

प्रतिबंध के बावजूद यदि धनबाद के अलग-अलग इलाकों में इस तरह का नेटवर्क संचालित हो रहा है, तो इसके पीछे कौन लोग हैं और इसे स्थानीय स्तर पर किसका संरक्षण प्राप्त है, यह बड़ा सवाल है. क्या बरोरा समेत अन्य इलाकों में वास्तव में अवैध लॉटरी टिकटों की छपाई हो रही है और यदि ऐसा है तो कथित ठिकानों तक पुलिस-प्रशासन की नजर क्यों नहीं पहुंची, इसकी जांच जरूरी है. टिकटों की सप्लाई, स्थानीय छपाई, मोबाइल बुकिंग, कोडवर्ड और डिलीवरी से जुड़े पहलुओं की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी. फिलहाल सामने आये दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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