GST नियमों में ऐतिहासिक बदलाव: अब टैक्स अधिकारियों की मनमानी गिरफ्तारी खत्म, कारोबारियों को मिली सबसे बड़ी आजादी

Manju
By Manju
4 Min Read

डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : वस्तु एवं सेवा कर परिषद की 57वीं बैठक में देश के व्यापारियों, करदाताओं और उद्योग जगत के लिए कई ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले लिए गए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक का मुख्य फोकस टैक्स दरों में बदलाव करने के बजाय ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार को आसान बनाने) और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व सरल बनाने पर रहा। सरकार के इस कदम को ‘जीएसटी 2.0’ की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसके तहत अब सिस्टम को कागजी कार्रवाई के बजाय पूरी तरह डेटा और ऑटोमेशन पर आधारित कर दिया गया है।

​मनमानी गिरफ्तारी और उत्पीड़न पर लगाम
जीएसटी कानून के तहत अधिकारियों के पास मौजूद मनमाने ढंग से गिरफ्तारी का अधिकार पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इसके साथ ही, अभियोजन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटा दिया गया है, जिससे छोटी-मोटी त्रुटियों के लिए कारोबारियों को अब अनावश्यक कानूनी डर और उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा।

​रजिस्ट्रेशन और रिफंड प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमैटिक
​रजिस्ट्रेशन: कम जोखिम (लो-रिस्क) वाले व्यापारियों को सिस्टम द्वारा मात्र 3 दिनों के भीतर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ऑटोमेटिक रजिस्ट्रेशन मिल रहा है। नाम, पता या डायरेक्टर बदलने जैसे बदलावों के आवेदन भी अब सिस्टम खुद-ब-खुद मंजूर कर लेगा।
​रिफण्ड : रिफंड क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है और 90% मामलों में रिफंड बिना किसी अधिकारी की दखलंदाजी के 3 दिन के भीतर सीधे खाते में ट्रांसफर हो जाएगा।

गलतियों सुधारने की सहूलियत और नोटिसों से राहत
अब रिटर्न में डेटा एंट्री की मामूली गलतियों पर सालभर में अपने-आप बनने वाले करीब 95,000 नोटिसों की प्रक्रिया को सुधारा गया है। अगर बेचने वाला अपने बिल में कोई सुधार करता है, तो इसका सीधा फायदा खरीदार को उसकी सेल्स स्टेटमेंट में स्वतः मिल जाएगा। साथ ही, ₹10,000 से कम के मामलों में कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा तथा नोटिस भेजने व सुनवाई के लिए एक तय स्टैंडर्ड बनाया गया है।

रास्ते में माल की चेकिंग पर कड़े नियम
सड़क पर अब कोई भी अधिकारी यूं ही गाड़ी नहीं रोक सकेगा। गाड़ी रोकने के लिए संयुक्त कमिश्नर रैंक के अधिकारी की मंजूरी और पुख्ता खुफिया जानकारी होना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, बीच के राज्यों (ट्रांजिट स्टेट्स) में गाड़ियां नहीं रोकी जाएंगी, चेकिंग केवल मूल या गंतव्य राज्य में ही होगी।

​ई-कॉमर्स और छोटे कारोबारियों को बड़ी छूट
​₹5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यापारी जो सीधे ग्राहकों को माल बेचते हैं, वे अब साल में एक बार रिटर्न भरेंगे और टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करेंगे।
​ई-कॉमर्स सेलर्स अब देश के किसी भी राज्य में बिना अलग ऑफिस खोले, किसी अन्य राज्य स्थित ई-कॉमर्स गोदाम को ही अपना मुख्य व्यावसायिक पता घोषित कर अपने राज्य से ही पूरे देश में कारोबार कर सकेंगे। इस तरह जीएसटी परिषद के इन सुधारों से कागजी पेचीदगियों और ‘इंस्पेक्टर राज’ का दौर पीछे छूट गया है, जिससे देश में व्यापार करना और अधिक सुगम हो गया है।

Share This Article