सावधान! पोटका में बेकाबू हुआ ‘ब्रेन मलेरिया’, 3 दिनों में तेजी से बढ़े आंकड़े, 4 मरीज अस्पताल रेफर

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रभावित इलाकों में संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मेगा जांच और इलाज अभियान शुरू कर दिया गया है। अभियान के तीसरे दिन 24 विशेष स्वास्थ्य टीमों ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए 1,193 लोगों की मलेरिया जांच की, जिसमें 133 लोग संक्रमित पाए गए हैं। सभी मरीजों को तत्काल मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है।

अस्पतालों में मुस्तैदी: 5 मरीज ठीक होकर घर लौटे, गंभीर मरीजों पर विशेष नजर
​सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका में डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे मरीजों की निगरानी कर रही है। राहत की बात यह है कि बेहतर इलाज के चलते 5 मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज दे दी गई है। फिलहाल CHC में 9 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं गंभीर रूप से बीमार 4 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए तुरंत एमजीएम और सदर अस्पताल रेफर किया गया है।

तीन दिनों का जांच डेटा: बढ़ता दायरा, तेज होती पहचान
​स्वास्थ्य विभाग ने जैसे ही जांच का दायरा बढ़ाया, मरीजों की पहचान भी तेज हो गई है ताकि समय रहते हर संक्रमित को दवा मिल सके।
​पहला दिन: 464 लोगों की जांच \ 28 संक्रमित मिले
​दूसरा दिन: 507 लोगों की जांच \ 51 संक्रमित मिले
​तीसरा दिन: 1,193 लोगों की जांच \ 133 संक्रमित मिले

क्यों जरूरी है तेज जांच?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जितने ज्यादा टेस्ट होंगे, उतनी ही जल्दी मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा, जिससे संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

ग्राउंड जीरो पर 108 डॉक्टर्स: घर-घर पहुंच रही है दवा
​इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए जिला स्तर पर चार विशेष मेडिकल टीमें बनाई गई हैं। कुल 108 डॉक्टरों को प्रभावित चार प्रखंडों में तैनात किया गया है। अकेले पोटका प्रखंड के गांवों में 17 डॉक्टरों की टीम घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच कर रही है। मौके पर ही जरूरी दवाइयों का मुफ्त वितरण किया जा रहा है। नुक्कड़ नाटकों और घोषणाओं के जरिए ग्रामीणों को मच्छरदानी लगाने, आसपास पानी जमा न होने देने और बुखार आते ही तुरंत टेस्ट कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

ग्रामीणों की मांग: समय पर हो फॉगिंग और डीडीटी का छिड़काव
​जंगल से सटे इन इलाकों में हर साल मलेरिया का खतरा रहता है, लेकिन इस बार इसके गंभीर रूप ब्रेन मलेरिया ने चिंता बढ़ाई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग मानसून की शुरुआत में ही डीडीटी का छिड़काव, लार्वा नष्ट करने की दवाएं और मच्छरदानी का वितरण समय पर कर देता, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती और कुछ मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल ग्रामीणों की नजरें स्वास्थ्य विभाग के इन कड़े कदमों और दवाओं के असर पर टिकी हैं ताकि जल्द से जल्द पोटका को मलेरिया मुक्त किया जा सके।

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