चाईबासा: अंधविश्वास पर कानून का कड़ा प्रहार, ‘डायन’ के शक में महिला की जान लेने वाले को उम्रकैद

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से अंधविश्वास के खिलाफ कानून के सख्त रुख की एक बड़ी खबर सामने आई है। जराईकेला थाना क्षेत्र में चार साल पहले डायन-बिसाही के झूठे शक में एक महिला की बेरहमी से हत्या करने वाले दोषी को अदालत ने ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी पर जुर्माना भी लगाया है।

अंधविश्वास की बलवेदी पर चढ़ी थी जान
​यह मामला जनवरी 2022 का है, जब समाज में फैली कुप्रथा और अंधविश्वास के चलते नयागांव के रहने वाले कानु बोदरा ने दियु बोदरा नाम की महिला पर डायन होने का झूठा शक किया और उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद जराईकेला पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए 3 जनवरी 2022 को आरोपी के खिलाफ हत्या (IPC 302), साक्ष्य छिपाने (IPC 201) और डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

वैज्ञानिक जांच ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
​इस मामले में चाईबासा पुलिस की पेशेवर तफ्तीश की बड़ी भूमिका रही। पुलिस ने न सिर्फ आरोपी कानु बोदरा को समय रहते गिरफ्तार किया, बल्कि मामले से जुड़े तमाम सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा किया। यही वजह रही कि अदालत में पुलिस का पक्ष बेहद मजबूत रहा और आरोपी कानून के शिकंजे से बच नहीं सका।

अदालत का फैसला: समाज के लिए कड़ा संदेश
​पश्चिमी सिंहभूम के जिला व अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम की अदालत में सत्रवाद संख्या 250/2022 के तहत इस मामले की लंबी सुनवाई चली। 17 जून 2026 को अदालत ने गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कानु बोदरा को हत्या का दोषी पाया।

न्यायालय की सख्त सजा
अदालत ने दोषी कानु बोदरा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीविका कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो आज के आधुनिक युग में भी डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं और अंधविश्वास के जाल में फंसकर निर्दोषों की जान लेते हैं। चाईबासा कोर्ट का यह निर्णय साफ संदेश देता है कि अंधविश्वास की आड़ में किए गए अपराध को कानून कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

Share This Article