किशनगंज से कांग्रेस सांसद ने संस्कृत का बताया बाहरी भाषा, बढ़ा सियासी बवाल

Neelam
By Neelam
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किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद के एक बयान से सियासी बवाल बढ़ गया है। एक वीडियो में सांसद मोहम्मद जावेद नई शिक्षा नीति और भाषाओं के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते दिख रहे हैं। इसमें कांग्रेस सांसद करते हैं कि, संस्कृत और अंग्रेजी बाहर से आई भाषा हैं, जबकि हिंदी और उर्दू हिंदुस्तान में पैदा हुई भारतीय भाषा है।

‘संस्कृत बाहर से आई भाषा लेकिन उर्दू हिंदुस्तान की

किशनगंज सांसद ने बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू विषय हटाए जाने का विरोध करते हुए दावा किया कि उर्दू हिंदुस्तानियों की जबान है, ये बाहर से नहीं आई है। जबकि संस्कृत और अंग्रेजी भाषा बाहर से आई हैं। सांसद ने कहा कि उर्दू हमारी जबान हैं जो हिंदुस्तान में पैदा हुई हैं।

नए डिग्री कॉलेजों से उर्दू विषय हटाए जाने का विरोध

पूरा मामला बीते सोमवार, 13 जुलाई का है। सांसद डॉ. जावेद किशनगंज के अंबेडकर टाउन हॉल के पास कांग्रेस सेवा दल के धरने में शामिल होने पहुंचे थे। बिहार के नए डिग्री कॉलेजों से उर्दू विषय हटाए जाने के फैसले का विरोध करते हुए उन्होंने कहा बिहार में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है। हम इसे इस तरह खत्म नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे दावा किया कि उर्दू ही यहां के लोगों की असली जबान है।

संस्कृत सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक

कांग्रेस सांसद ने किस प्रमाण के आधार पर ये दावा दिया है, इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि, जानकारों और भाषा के विद्वानों की मानें तो संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है, जिसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप में ही हैं। वैदिक संस्कृत की रचनाएं ऋग्वेद लगभग 1500 ईसा पूर्व की मानी जाती हैं। महर्षि वाल्मीकि की रामायण, महर्षि वेदव्यास की महाभारत तथा भगवद गीता जैसी अमर कृतियां संस्कृत में ही रचित हैं। ये ग्रंथ हजारों वर्षों से सनातन धर्म, दर्शन, विज्ञान, खगोलशास्त्र और साहित्य की आधारशिला रहे हैं।

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