May 26, 2022

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कोयला तस्करों का नया अड्डा बना गोविंदपुर एवम निरसा क्षेत्र : जमकर हो रही कोयले की तस्करी

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बरवा व आसपास का इलाका कारोबार का मुख्य केंद्र

मिरर मीडिया : इन दिनों गोविंदपुर व निरसा क्षेत्र कोयला तस्करों का नया अड्डा बन गया है यहाँ आसपास कोयला खदान नहीं होने के बावजूद आजकल इन क्षेत्र में जमकर कोयले कि तस्करी हो रही है।

गोविंदपुर-निरसा की सीमा पर स्थित बरवा कोयला के अवैध कारोबार का मुख्य केंद्र बना हुआ है। बरवा में जीटी रोड के किनारे स्थित हार्डकोक भट्ठा की आड़ में अवैध धंधा चलता है। ओझा, सिंह, अग्रवाल व गोयल के भट्ठा से प्रतिदिन 100-150 ट्रक कोयले की तस्करी की जाती है। इस तरह प्रतिदिन 2500-3750 टन कोयला बाहर भेजा जा रहा है। इन जगहों पर झरिया क्षेत्र की एक आउटसोर्सिंग कंपनी से कोयला जमा किया जाता है। इसके अलावा हार्डकोक उद्योग में बेरमो व फुसरो से एमपीएल भेजे जा रहे हाईवा से कोयला की जमकर कटिंग की जाती है। धंधेबाज काफी चालाकी से काम लेते हैं।

एक हाईवा को प्रतिदिन दिया जाता है 10 हजार

हाईवा को रोककर होती है कोयले की कटिंग

कटिंग के बाद हाईवा में मिट्टी व खदान मिलाकर कर दिया जाता है वजन

कटिंग के दौरान हाइवा लंबे समय तक एक स्थान पर रुकता है। इसे छुपाने के लिए धंधेबाज ने संबंधित कंपनियों में सेटिंग कर रखी है। वहां 10 हजार रूपए प्रतिदिन हाईवा देकर खाली कराया जाता है। कटिंग के बाद हाईवा में मिट्टी व खदान का ओबी मिलाकर वजन पूरा किया जाता है।


एक हार्डकोक भट्ठा के अंदर डीपो खोल कर रखा गया है। यहां स्टीम कोयला जमा किया जाता है। निरसा सीमा पर जंगलपुर में कोयला डिपो का संचालन हो रहा है। निरसा के बड़ईगढ़ा होकर डिपो में कोयला पहुंचता है। साइकिल व बाइक से निरसा की चापापुर और बैजना कोलियरी से चोरी कर बड़ईगढ़ा व आसपास अवैध खनन पर कोयला जंगलपुर पहुंचाया जाता है।

कुल मिलाकर निरसा और गोविंदपुर क्षेत्र में धड़ल्ले से कोयले की तस्करी होती है संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी होती है बावजूद किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होती दिखावे के लिए कुछ करवाई कर दिए जाते हैं लेकिन बाद में सब सेटिंग हो जाता है। सूत्रों की माने तो अधिकारी कार्रवाई करते हैं अपनी कीमत बढ़ाने के लिए करवाई करने के बाद तस्करों से रेट बढ़ा दी जाती है उसके बाद फिर से कोयले की तस्करी का खेल शुरू हो जाता है।

निरसा में गोप एवं सिंह मिलकर करते हैं कोयले की तस्करी

नीचे से ऊपर तक सभी को पहुंचाया जाता है हिस्सा

निरसा, झरिया ,बलियापुर और कतरास से आने वाले अवैध कोयला लदे ट्रकों को जाली कागज उपलब्ध करा ट्रकों के पकड़े जाने पर छुड़वाने का जिम्मा लिया जाता है। निरसा एवम गोविंदपुर क्षेत्र  कोयला तस्करों के लिए सेफ जोन बन गया है। फर्जी कंपनी के नाम पर तस्करों को जीएसटी व  ई- वे  बिल उपलब्ध कराया जाता है। यहां से कोयला बंगाल के अलावा अन्य राज्यों के मंडियों में भेजा जाता है।

पाण्डे के द्वारा कराया जाता है जाली कागजात उपलब्ध

300 रूपय में प्रति टन पर दिए जाते है जाली कागजात

गोविंदपुर क्षेत्र में कोयला से लदे ट्रकों को फर्जी कागज उपलब्ध कराने व पकड़े जाने पर छुड़ाने का जिम्मा लेने वाले में पांडे, चौधरी, मैथन के सिंह व चिरकुंडा के महतो मुख्य चेहरे हैं। इसके लिए 300 रुपए प्रति टन वसूले जाते हैं। कुछ लोग तो तीन-चार फर्जी फॉर्म बनाकर जीएसटी पेपर व  ईवे बिल के अलावा अन्य कागजात भी उपलब्ध कराते हैं। कागजात उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों का बनाया जाता है। निरसा, कतरास व झरिया से जीटी रोड पहुंचने वाले ट्रकों को राजगंज तक कागजात उपलब्ध करवाया जाता है।

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