डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : भारत के न्यूक्लियर पावर प्रोग्राम और सामरिक शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के खदानडुंगरी सुंगरी ब्लॉक में यूरेनियम का एक नया और बड़ा भंडार मिला है। केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में यूरेनियम की खोज (प्रोस्पेक्टिंग) के लिए 0.225 हेक्टेयर वन भूमि पर स्टेज-1 की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
अगले 10 साल की जरूरतें होंगी पूरी
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यूरेनियम रिसोर्स का पता लगाना बेहद जरूरी है। जानकारों के मुताबिक पूर्वी सिंहभूम में मिला यह नया भंडार अगले 10 वर्षों तक देश की यूरेनियम की जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है। आपको बता दें कि इस क्षेत्र के आसपास (जादूगोड़ा, मुसाबनी, पोटका) पहले से ही यूसीआईएल की खदानें संचालित हैं। इसके अलावा गुड़ाबांदा के कन्यालुका गांव में भी यूरेनियम का भंडार मिला है, जिसके लिए 2 एकड़ भूमि 10 साल की लीज पर मांगी गई है। इससे पहले बानाडुंगरी-सिमरीडुंगरी में 11 हजार टन और राजदा में 5 हजार टन यूरेनियम का भंडार मिल चुका है।
पर्यावरण का भी रखा जाएगा पूरा ध्यान
केंद्र सरकार के वन संरक्षण व संवर्धन अधिनियम 1980 के तहत यह मंजूरी दो साल के लिए दी गई है। इस खोज के दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए एक खास शर्त रखी गई है।
ग्रीन शर्त: यूजर एजेंसी को राज्य सरकार के वन विभाग के सहयोग से क्षेत्र में 2750 बड़े पेड़ लगाने होंगे, ताकि प्रकृति का संतुलन बना रहे।
कैसे होगी खुदाई? क्या है रेडिएशन का खतरा?
आमतौर पर यूरेनियम का नाम सुनते ही लोग रेडिएशन (विकिरण) के खतरे से डर जाते हैं, लेकिन इस रिपोर्ट में साफ किया गया है कि यहां रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है।
सुरक्षित तकनीक: यूरेनियम की खुदाई का तरीका पूरी तरह सुरक्षित और आधुनिक है।
वैज्ञानिक प्रक्रिया: सैटेलाइट सर्वे के जरिए सटीक स्थान का चयन किया जाता है। इसके बाद महज 3 सेंटीमीटर की पाइप से खुदाई करके यूरेनियम ओर के सैंपल निकाले जाते हैं, जिनकी जांच प्रयोगशाला में होती है।
30 बोर होल में होगी ड्रिलिंग
इस नए ब्लॉक में यूरेनियम की गहराई और मात्रा का सटीक अनुमान लगाने के लिए कुल 30 बोर होल की ड्रिलिंग की जाएगी। इसमें से 5 बोर होल खदानडुंगरी एरिया में और बाकी 25 बोर होल जंगल क्षेत्र में किए जाएंगे। इसके लिए परमाणु खनिज अन्वेषण व अनुसंधान निदेशालय के क्षेत्रीय निदेशक डी. भट्टाचार्य की ओर से भेजे गए आवेदन पर केंद्र ने मुहर लगा दी है।

