सम्राट चौधरी के सीएम बनते ही शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग, कुशवाहा के विधायक की बड़ी अपील

Neelam
By Neelam
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बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज होती दिख रही है। बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही शराबबंदी कानून की चर्चा जोरों पर है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस मुद्दे की समीक्षा करने की अपील की है।

नई सरकार से जताई उम्मीद

आरएलएम विधायक माधव आनंद मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए शराबबंदी समाप्त करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस मुद्दे की समीक्षा करें। उन्होंने कहा, वह इस मुद्दे को लेकर सदन के अंदर जितने गंभीर थे, बाहर आने के बाद भी उतने ही गंभीर हैं। उनका मानना है कि अब समय आ गया है कि शराबबंदी कानून के हर पहलू की विस्तार से समीक्षा की जाए। नई सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि नई ऊर्जा के साथ काम करते हुए सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी।

विधानसभा सत्र की बातों को किया याद

विधायक माधव आनंद ने पत्रकारों से कहा कि आपको याद होगा जब विधानसभा का सत्र चल रहा था। उस समय मैंने बड़ी गंभीरता से, धैर्य के साथ, अनुशासन के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष कहा था कि अब वक्त आ गया है कि शराबबंदी की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए। माधव आनंद ने यह भी कहा कि वर्तमान हालात में शराबबंदी का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है और इससे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।

सीएम से मुलाकात की तस्वीर की साझा

माधव आनंद आज प्रदेश के नए सेम से मुलाकात करने पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखा, ”आज बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. उनसे आत्मीय मुलाकात के दौरान बिहार के विकास, सुशासन एवं जनकल्याण को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। मुझे पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में बिहार प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुएगा और एक नया इतिहास रचेगा।”

विधानसभा में उठाया था शराबबंदी का मुद्दा

बता दें, माधव आनंद ने इससे पहले भी विधानसभा में शराबबंदी कानून पर समीक्षा करने की बात कही थी। पिछले विधानसभा सत्र में अपने सम्बोधन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक माधव आनंद ने कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण और साहसिक फैसले लिए हैं, जिनसे राज्य को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वह समय-समय पर अपनी योजनाओं और नीतियों की समीक्षा करती रही है। विधायक ने शिक्षकों की बहाली का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी सरकार ने मांग के बाद भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की और फिर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कराई। उन्होंने कहा कि इसी तरह अब शराबबंदी कानून को लेकर भी समीक्षा का समय आ गया है।

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