नेपाल में हालात बदतर हो चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच नेपाल की 18 जिलों की जेल से करीब 6 हजार कैदी फरार हुए हैं। नेपाल की जेल से भागे 5 कैदियों ने भारत-नेपाल बॉर्डर के जरिए भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की है। हालांकि ये घुसपैठिये अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

नेपाल की जेल से भागे हुए 30 कैदियों को भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश के दौरान सशस्त्र सीमा बल ने गिरफ्तार कर लिया। इन गिरफ्तारियों में से 17 कैदियों को उत्तर प्रदेश से, जबकि 13 को पश्चिम बंगाल और बिहार से पकड़ा गया है। उत्तर प्रदेश में गिरफ्तारियां लखीमपुर, बहराइच और बलरामपुर में रात भर की गई गश्त के दौरान हुईं। यह कार्रवाई नेपाल की जेल से कैदियों के भागने की खबर के बाद शुरू की गई थी।
मोतिहारी में घुसपैठ की कोशिश नाकाम
बिहार के मोतिहारी के कुंडवा चैनपुर बॉर्डर पर तैनात एसएसबी की टीम ने बुधवार दोपहर महुलिया बॉर्डर के पास जांच के दौरान इन कैदियों को पकड़ा। बताया जाता है कि नेपाल में जारी विद्रोह का फायदा उठाकर सभी आरोपी जेल तोड़कर भाग निकले थे। एसएसबी की 20वीं बटालियन, सीतामढ़ी के कमांडेंट गिरीशचंद्र पांडेय ने पुष्टि की कि कुंडवा चैनपुर बटालियन ने ही इन कैदियों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए कैदियों की पहचान रौतहट जिले के गौर गढ़वा वार्ड नंबर-5 निवासी विश्वनाथ यादव, रवि यादव, राहुल राय यादव, चंद्रानिकाहपुर के सूरज राय और गरुवा निवासी राम विनोद प्रसाद के रूप में हुई है।
सीतामढ़ी के पास बॉर्डर से 10 दबोचे गए
इसी तरह सीतामढ़ी से सटे नेपाल के महोत्तरी जिले में स्थित जलेश्वर जेल से 550 कैदी भऊग खड़े हुए। इस घटना के बाद भी एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने 10 फरार कैदियों को भारत में घुसने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया। इनमें से आठ नेपाल के नागरिक हैं, जबकि दो भारतीय हैं। भारतीय कैदियों में वैशाली जिले के ओमप्रकाश सिंह और मोतिहारी जिले के गुड्डू कुमार यादव शामिल हैं।
आक्रोश की आग में “जल” रहा नेपाल
नेपाल में सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, और एक्स) पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए थे। इन प्रदर्शन में जेन-जी जेनरेशन के लोग भारी संख्या में थे। लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो गई, जिसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसके बीद नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत अन्य जिलों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए और इसने हिंसा का रूप धारण कर लिया। इस दौरान कई नेताओं के घरों पर हमला हुआ। पीएम ओली के इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा खत्म नहीं हुआ और उन्होंने कई इमारतों में आग लगा दी। अब हालात ये हैं कि नेपाल जल रहा है और इसकी कमान अब सेना ने अपने हाथ में ले ली है और पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया है।

