डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर:झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में इंसानों और हाथियों के बीच का संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। ईचागढ़ थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है।गुरुवार की रात एक बार फिर एक जंगली हाथी ने भारी तबाही मचाई, जिसमें एक 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग डर के साए में रातें काटने को मजबूर हैं।
घर से निकलते ही काल बन कर आया हाथी
मिली जानकारी के अनुसार ईचागढ़ थाना क्षेत्र के लाबा टोला वनडीह की रहने वाली चंपा सिंह मुंडा (60 वर्ष) गुरुवार की रात जैसे ही अपने घर से बाहर निकलीं, पहले से वहां मौजूद जंगली हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हाथी ने बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पटक-पटक कर मौके पर ही मार डाला। हाथी ने न सिर्फ चंपा सिंह की जान ली, बल्कि उनके आशियाने को भी तहस-नहस कर दिया।
मलबे में तड़पती रहीं घायल महिलाएं
हाथी का तांडव यहीं नहीं रुका। ईचागढ़ प्रखंड के कुटाम गांव में भी हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। यहां हाथी ने सरला देवी और सुंदमनी देवी के घरों को ध्वस्त कर दिया। घर ढहने से दोनों महिलाएं मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गई। फिलहाल दोनों का इलाज ईचागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है।
अपनों को खोने का सिलसिला: 2 महीने, 5 मौतें
यह कोई पहली घटना नहीं है। ईचागढ़ और तिरूलडीह थाना क्षेत्र इस वक्त ‘डेथ जोन’ बनते जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो महीनों के भीतर हाथी के हमले में 5 लोगों की जान जा चुकी है।
24 अप्रैल: ईचागढ़ के हाड़ात गांव में एक हाथी ने मां-बेटी को कुचलकर मार डाला था।
ताजा घटना: चंपा सिंह मुंडा की मौत ने वन विभाग की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है।
प्रशासन की कार्रवाई: शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा, मिला मुआवजा
घटना की सूचना मिलते ही वन रक्षी कैलाश महतो और ईचागढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सुरक्षित रखा और शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सरायकेला भेज दिया। वन विभाग की ओर से मृतक महिला की बेटी मालती सिंह मुंडा को तत्काल 50,000 रुपये की मुआवजा राशि सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाकी के 3.5 लाख रुपये भी जल्द दे दिए जाएंगे।
खेत जाने से भी डर लगता है— बेबस ग्रामीण और सुलगते सवाल
इस लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों का गुस्सा और डर अब सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों ने सरकार और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के डर से अब किसान अपने खेतों में जाने से भी कतराने लगे हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। वन विभाग सिर्फ मौत के बाद मुआवजा बांटने तक सीमित है, हाथियों को रिहाइशी इलाकों से दूर रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

