डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : ‘नीला घोड़ा रा असवार’, ‘मेवाड़ी राणा’ और ‘हिंदुआ सूरज’ जैसे विशेषणों से सुशोभित वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 487वीं जयंती शनिवार को लौहनगरी में पूरे गौरव के साथ मनाई गई। झारखंड क्षत्रिय संघ के मार्गदर्शन में युवा इकाई द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने साकची मरीन ड्राइव गोलचक्कर को केसरिया रंग और भक्ति के उल्लास से सराबोर कर दिया।
शंखनाद के साथ हुआ महानायक का वंदन
कार्यक्रम का आगाज़ पांच पुरोहितों द्वारा किए गए मंगल शंखनाद से हुआ। इसके बाद महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा पर तिलक लगाकर और माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे चौक को भगवा ध्वजों और ताजे फूलों से किसी राजदरबार की तरह सजाया गया था, जो वहां मौजूद हजारों लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
इतिहास के पन्नों पर चर्चा: ‘इतिहासकारों ने की नाइंसाफी’
समारोह के मुख्य वक्ता प्रख्यात साहित्यकार और शिक्षा निकेतन स्कूल के पूर्व प्राचार्य अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण पहलू उठाया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता के साथ वामपंथी इतिहासकारों ने बड़ी नाइंसाफी की है। किताबों में जो लिखा है, महाराणा का व्यक्तित्व उससे कहीं अधिक प्रेरणादायक और विराट था। उन्होंने घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन विदेशी आक्रांताओं के आगे घुटने नहीं टेके।
एक मंच पर जुटे शहर के दिग्गज
इस अवसर पर राजनीतिक और सामाजिक सीमाओं को दरकिनार कर सभी दलों के नेता एक मंच पर नज़र आए।
उपस्थित प्रमुख हस्तियां
भाजपा: अभय सिंह, संजीव सिन्हा (जिला अध्यक्ष)।
झामुमो: कुणाल सारंगी (पूर्व विधायक), महावीर मुर्मू।
क्षत्रिय संघ: शम्भूनाथ सिंह (अध्यक्ष), अमित सिंह (सचिव)।
अन्य: समाजसेवी मनोज सिंह, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अजय गुप्ता और कई गणमान्य लोग।
सेवा और संस्कृति का संगम
भीषण गर्मी को देखते हुए क्षत्रिय युवा संघ ने सामाजिक सरोकार का परिचय दिया। शहर के 15 अलग-अलग स्थानों पर सेवा शिविर लगाकर आम नागरिकों के बीच शीतल पेय और खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। वही सांस्कृतिक संध्या में सोनारी के प्रसिद्ध गायक सोनू दुलरुआ और उनकी टीम ने देशभक्ति गीतों से समां बांध दिया।
नारी शक्ति की भी रही सक्रिय भागीदारी
झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की 27 इकाइयों ने महामंत्री मंजू सिंह के नेतृत्व में प्रतिमा पर माल्यार्पण कर महाराणा प्रताप के आदर्शो को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के सफल संचालन में रवि सिंह और सुखदेव सिंह की मुख्य भूमिका रही।

