बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। शराब के साथ या शराब पीने की स्थिति में पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, इन दावों के बीच राजधानी पटना के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘विकास भवन’ (सचिवालय) परिसर से शराब की खाली बोतलें बरामद हुई हैं। इस घटना के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है।
सचिवालय के कूड़ेदान में शराब की खाली बोतलें
सोमवार को सचिवालय के कूड़ेदान में शराब की खाली बोतलें बरामद हई। बताया जा रहा है कि सफाई के दौरान सचिवालय के विकास भवन स्थित कार्यालय के अंदर रखे डस्टबीन में शराब कि बोतल पड़ी थीं। सफाईकर्मी ने डस्टबिन के अंदर से शराब की बोतल बाहर निकाली तो आसपास के कर्मियों में हड़कंप मच गया। कर्मियों ने पास के कार्यालय में जाकर इस बात की जानकारी अपने अधिकारी को दी।
अंग्रेजी शराब की बोतलें हुई बरामद
सचिवालय विकास भवन में गेट नंबर 6 के पास नगर विकास विभाग के पदाधिकारी के कार्यालय के बाहर शौचालय के पास रखा हुआ डस्टबिन में अंग्रेजी शराब की खाली बोतल मिलने से सचिवालय में हंगामा मचा हुआ है। कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि आखिर यह बोतल कहां से आई और किसने रखा।
शराबबंदी कानून की सफलता पर सवाल
इस घटना के बाद सरकार सवालो के घेरे में आ गई है। शराब बिहार में बंद है तो यह शराब कैसे सचिवालय पहुंच ये सवाल उठ खड़ा हुआ है। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए शराबबंदी कानून की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून का फायदा आम जनता को नहीं बल्कि रसूखदारों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल दलितों और अतिपिछड़े समाज के लोगों को पकड़कर जेल भेज रही है, जबकि असली खेल सत्ता के संरक्षण में चल रहा है। जहरीली शराब से हो रही मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा अब दूसरे खतरनाक नशों की गिरफ्त में आ रहे हैं और सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है
रोहिणी आचार्य ने भी कसा तंज
लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि ‘बिहार में शराब की पहुंच सत्ता के गलियारों तक है। सरकार की नाक तले शराब की बोतल पाए जाने से ही ये साबित होता है कि अवैध शराब के कारोबारियों की पहुंच सरकारी तंत्र से ज्यादा है। और अवैध शराब के कारोबार की जड़ें सरकार से भी ज्यादा मजबूत हैं।’

