बिहार की सियासत में एक दिलचस्प मोड़ उस वक्त देखने को मिला जब राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने सत्ता के गलियारों से निकलकर सीधे क्लासरूम का रुख किया। मंत्री अशोक चौधरी ने बुधवार को अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया। दरअसल, गुरुवार को अशोक चौधरी असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में छात्रों को पढ़ाने के लिए पटना के एएन कॉलेज पहुंचे। उन्होंने पहली बार बतौर प्रोफेसर छात्रों को पॉलिटिकल साइंस पढ़ाया।
कॉलेज में दिखा वीआईपी मूवमेंट जैसा माहौल
अशोक चौधरी जैसे ही एएन कॉलेज पहुंचे, वहां मौजूद छात्रों और शिक्षकों में उत्साह देखने को मिला। मंत्री जी क्लास लेने पहुंचे तो पूरा माहौल किसी वीआईपी मूवमेंट जैसा दिखा। क्लास के अंदर जहां वे छात्रों को राजनीतिक व्यवहार के सिद्धांत समझा रहे थे, वहीं बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी और कैमरों की चहल-पहल ने इस ‘क्लास’ को सामान्य शैक्षणिक गतिविधि से अलग बना दिया।
35 साल बाद क्लास में पहुंचे चौधरी
अशोक चौधरी ने राजनीति शास्त्र के छात्रों को ‘सेंट्रल-स्टेट रिलेशनशिप’ विषय पर क्लास ली। यह विषय भारतीय संघीय ढांचे और केंद्र-राज्य संबंधों की समझ से जुड़ा है, जिसे उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उन्होंने 1991 में राजनीति शास्त्र में अपना स्नातकोत्तर पूरा किया था। इसके बाद, वे मुख्यधारा की राजनीति में शामिल हो गए। लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, जब वे एक बार फिर कक्षा में छात्रों के सामने खड़े हुए, तो उन्होंने अपनी भावनाओं को छिपाने का कोई प्रयास नहीं किया।
छात्रों को पढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी- अशोक चौधरी
अशोक चौधरी ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘रैलियों और विधानसभा में भाषण देना एक बात है, लेकिन कक्षा में छात्रों को पढ़ाना कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी है। सच कहूं तो, मैं थोड़ा घबराया हुआ महसूस कर रहा था।’ उन्होंने बताया कि ‘वह सिलेबस के अनुसार ही पढ़ा रहे हैं और कोशिश है कि छात्रों को विषय की बेहतर समझ दी जाए।’
नियुक्ति से पहले हुआ काफी विवाद
बता दें कि अशोक चौधरी की प्रोफेसर नियुक्ति को लेकर पहले काफी विवाद हुआ था। उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठे, जांच के आदेश दिए गए और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर बहस छिड़ी रही। हालांकि जांच के बाद उनका प्रमाण पत्र सही पाया गया, जिसके बाद उनके प्रोफेसर बनने का रास्ता साफ हो गया।

