बिहार सरकार 92 हजार करोड़ के खर्च का हिसाब नहीं दे पाई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक 92 हजार 132 करोड़ रुपए का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं हुआ है। पिछले साल तक यह राशि 70 हजार 877 करोड़ रुपए थी। ऐसे में बिहार विधानसभा के आखिरी दिन इस पर भारी बवाल होना तय है।
कुल बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हुआ
सीएम सम्राट चौधरी सरकार की वित्तीय व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक विभिन्न विभागों द्वारा खर्च की गई करीब 93 हजार करोड़ रुपये की राशि से जुड़े 62,632 उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं किए गए हैं। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढ़ी है।
लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों 26.15 प्रतिशत की वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में 70,876.61 करोड़ रुपये से संबंधित 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे, जबकि वर्ष 2025 में 93,132.75 करोड़ रुपये से संबंधित 62,632 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित पाए गए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 26.15 प्रतिशत की वृद्धि है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपयोगिता प्रमाण पत्रों का लंबित रहना निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है और इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
इन विभागों पर सबसे ज्यादा सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र पंचायती राज विभाग के हैं, जहां लगभग 32 हजार करोड़ रुपये का हिसाब लंबित है। इसके बाद शिक्षा विभाग के करीब 19 हजार करोड़ रुपये, नगर विकास एवं आवास विभाग के लगभग 17.8 हजार करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास विभाग के 6.4 हजार करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग के करीब 3 हजार करोड़ रुपये से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए हैं।
बजट बढ़ा लेकिन पूरा खर्च नहीं कर सकी सरकार
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार का कुल बजट बढ़कर 3,64,518.87 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन राज्य सरकार 2,87,178.49 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। इस प्रकार 77,340.38 करोड़ रुपये, यानी कुल बजट का लगभग 27.22 प्रतिशत, व्यय नहीं हो सका। कैग के अनुसार, यह स्थिति बजट अनुमान और वास्तविक आवश्यकताओं के सटीक आकलन में कमी को दर्शाती है।

